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पीएम मोदी ने ट्रंप से हाथ मिलाया, लेकिन गले नहीं मिले… G7 शिखर सम्मेलन के पहले दिन दोनों नेताओं के बीच हुई मुलाकात का खुलासा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मंगलवार को फ्रांस के एवियन में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान एक छोटी मुलाकात हुई। करीब डेढ़ साल में दोनों नेताओं की यह पहली आमने-सामने की मुलाकात थी. मोदी और ट्रंप गर्मजोशी से हाथ मिलाते दिखे और इसके बाद उन्होंने कुछ देर बातचीत भी की. इस दौरान दोनों नेता एक दूसरे से असहज दिखे. पढ़ें ट्रंप और मोदी की मुलाकात का डिकोड-

1- फोटोशूट के दौरान पीएम मोदी और ट्रंप दोनों ने एक-दूसरे को नजरअंदाज करने की कोशिश की. ऑपरेशन सिन्दूर के बाद की कड़वाहट साफ दिख रही थी. हालाँकि, वे दोनों यह देखना चाहते थे कि कौन हाथ बढ़ाने की पहल करेगा।

2- G7 शिखर सम्मेलन के सभी नेता उस वक्त हैरान रह गए जब ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ट्रंप को दरकिनार कर मोदी से मिले और दोनों गले मिले.

3- फोटोशूट के बाद जब पीएम मोदी हॉल में गए तो आखिरकार ट्रंप ने उनसे हाथ मिलाने की पहल की. मोदी हाथ मिलाने के लिए आगे बढ़े क्योंकि मोदी की सीट ट्रंप के बिल्कुल बगल में थी और ट्रंप ने सबसे पहले अपनी सीट ली थी. मोदी पीछे से आये, लेकिन गले नहीं मिले.

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4- शिखर सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत से पहले पीएम मोदी और ट्रंप के बीच कुछ मिनट तक बातचीत हुई. क्या कहें, वह बहुत प्राइवेट थी. दुभाषिया के अलावा कोई नहीं जानता।

5- बैठक के बाद जानकारी मिली कि पीएम मोदी ने ओमान की खाड़ी में जहाज पर हमले और नाविकों की मौत का मुद्दा उठाया.

6- शिखर सम्मेलन में फ्रांस ने मोदी को ट्रंप के बराबर जगह दी, जबकि भारत G7 का स्थायी सदस्य नहीं है. यह जगह कभी रूसी राष्ट्रपति पुतिन की थी – जब G7 शिखर सम्मेलन हुआ करता था तब G-8 हुआ करता था, लेकिन क्रीमिया पर कब्ज़ा करने के बाद G7 ने 2014 में रूस को इस विशिष्ट समूह से बाहर कर दिया था। ऐसे में दुनिया ने यह अनुमान लगाना शुरू कर दिया है कि क्या भारत को इस समूह में स्थायी स्थान देकर G8 नाम फिर से बदल दिया जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति के बगल वाला एक स्थान मेजबान देश के राष्ट्रप्रमुख के लिए होता है, जबकि दूसरा स्थान अमेरिका के बाद अगले सबसे शक्तिशाली देश के राष्ट्रप्रमुख के लिए होता है।

ट्रंप की नीतियों पर पीएम मोदी का तंज

इसके अलावा पीएम मोदी ने अपने संबोधन में जो कहा था, वह यह था कि ‘आज की दुनिया में सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति न खनिज है, न तकनीक, न बाजार, बल्कि आपसी विश्वास है.’ ये भी ट्रंप और अमेरिका की नीतियों को लेकर एक कटाक्ष था.

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