जिनेवा में होने वाली शांति वार्ता से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर बम गिराया है. ट्रंप ने फिर कहा है कि अगर ईरान ने डील नहीं मानी तो उस पर एक बार फिर बमबारी की जाएगी, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि ट्रंप को ऐसा कहने की जरूरत क्यों पड़ी. क्या ईरान के हाथों नैरेटिव युद्ध हारने के बाद ट्रम्प को यह बयान देना पड़ा?
ट्रंप ने अपने जन्मदिन पर जल्दबाजी में ईरान के साथ एमओयू की घोषणा की, लेकिन इस समझौते का मसौदा साझा नहीं किया. उधर, ईरान ने एमओयू की शर्तें दुनिया के सामने रखीं। इस एमओयू की कुछ शर्तें ऐसी हैं कि ट्रंप को बैकफुट पर रहना होगा. सबसे बड़ी शर्त थी- ईरान को 300 अरब डॉलर का फंड, जो युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई के लिए है.
अमेरिकी संसद में विपक्ष ने ट्रंप को घेरा
ईरान के साथ समझौते की घोषणा से पहले ट्रंप ने खुलेआम कहा था कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने कार्यकाल के दौरान दिए गए असैन्य परमाणु समझौते में ईरान को पूरे डॉलर दिए थे. ऐसे में अमेरिका की विपक्षी पार्टी डेमोक्रेटिक पार्टी ने ट्रंप को आड़े हाथों लिया.
अमेरिकी मीडिया ट्रंप और प्रशासन के अन्य अधिकारियों द्वारा एमओयू को सार्वजनिक नहीं करने पर भी सवाल उठा रहा है. ऐसे में ट्रंप का परेशान होना स्वाभाविक था और उन्होंने फिर से ईरान पर बमबारी की बात कही.
अमेरिका के पूर्व उपराष्ट्रपति ने ट्रंप को आड़े हाथों लिया
ट्रंप के एमओयू पर अमेरिका के पूर्व उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने भी मोर्चा खोल दिया है. पेंस ने साफ तौर पर कहा कि जिस तरह ट्रंप ने एमओयू में हमास और हिजबुल्लाह जैसे संगठनों के बारे में एक शब्द भी नहीं कहा, वह ट्रंप की तुष्टीकरण यानी ईरान के प्रति नरम रुख को दर्शाता है. ओबामा ने भी कुछ ऐसा ही नरम रुख दिखाया था. 300 अरब डॉलर के फंड और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर खुलकर न बोलने के लिए भी पेंस की आलोचना की गई है.
समझौते के कारण इजराइल के साथ रिश्तों में खटास आ गई है
उधर, लेबनान और हिजबुल्लाह को लेकर ट्रंप के अपने सबसे अच्छे दोस्त इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ भी रिश्तों में खटास आ गई है। इजराइल ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते को मानने से साफ इनकार कर दिया है. नेतन्याहू ने दो टूक कहा है कि डील हो या न हो, ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार बनाने की इजाजत नहीं दी जाएगी.
अमेरिकी मीडिया के बार-बार सवाल पूछने पर अब ट्रंप ने कहा है कि एमओयू का मसौदा जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा और वह इसमें लिखा एक शब्द प्रेस कॉन्फ्रेंस में पढ़ेंगे. हर तरफ से आलोचना के चलते ट्रंप ने एमओयू पर ही सवाल उठा दिए. ट्रंप ने कहा कि एमओयू को ईरान के साथ समझौता नहीं माना जाना चाहिए. जिनेवा में बातचीत के बाद अलग से अंतिम समझौता किया जाएगा।
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