अमेरिका और इजराइल के साथ हालिया तनातनी के बाद अब ईरान दुनिया को अपनी कूटनीतिक पहुंच और घरेलू एकजुटता का संदेश देने की कोशिश करता नजर आ रहा है. तेहरान पूर्व सर्वोच्च नेता सैय्यद अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा में भारत सहित लगभग 100 देशों के प्रतिनिधियों और लाखों लोगों की भीड़ की मौजूदगी को अपनी ताकत और वैश्विक समर्थन के प्रदर्शन के रूप में पेश कर रहा है।
तेहरान से शुरू हुई सात दिनों की अंतिम यात्रा
करीब चार महीने पहले हुई मौत के बाद 3 जुलाई को अली खामेनेई का पार्थिव शरीर पहली बार आम लोगों के बीच लाया गया. इसके साथ ही उनकी सात दिनों की अंतिम यात्रा शुरू हो गई. यह यात्रा ईरान और इराक के पांच शहरों से होते हुए करीब 3,000 किलोमीटर की दूरी तय करेगी और ईरान के मशहद शहर में खत्म होगी, जहां उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा.
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भारत समेत 100 देशों की मौजूदगी
ईरान के मुताबिक, अंतिम यात्रा में 100 देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं. भारत की ओर से बिहार के राज्यपाल (सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पहुंचे हैं।
इसके अलावा फिलिस्तीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, इराक, रूस, उज्बेकिस्तान, अफगानिस्तान, बुल्गारिया और कुर्दिस्तान क्षेत्र के प्रतिनिधि भी तेहरान पहुंचे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की स्थायी समिति के उपाध्यक्ष हे वेई और बांग्लादेश संसद के अध्यक्ष हाफिज उद्दीन अहमद को भी उनकी भागीदारी के बारे में सूचित किया गया है।
2 करोड़ से ज्यादा लोगों के जुटने का दावा
तेहरान की ओर से दावा किया गया है कि अंतिम यात्रा में 2 करोड़ से ज्यादा लोग शामिल होंगे. वहीं, क़ोम शहर में शुक्रवार की नमाज़ के इमाम अयातुल्ला मोहम्मद सईदी ने कहा कि यह अंतिम यात्रा ईरान के लिए ‘एक और जनमत संग्रह’ की तरह साबित होगी, जो दुनिया को देश की एकता का संदेश देगी.
युद्ध के बाद एकता का संदेश
ईरानी अधिकारियों और समर्थकों का कहना है कि जनाजे में उमड़ी भीड़ से पता चलता है कि हालिया युद्ध के बावजूद देश की जनता अपने नेतृत्व और व्यवस्था के साथ मजबूती से खड़ी है. ईरान सड़कों पर जुटे लोगों को शहादत की श्रद्धांजलि और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के तौर पर पेश कर रहा है.
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क्या हुआ?
ईरान के मुताबिक, 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले में अली खामेनेई, उनके परिवार के कई सदस्य और कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए थे. इसके बाद सुरक्षा कारणों से उनका अंतिम संस्कार तुरंत नहीं किया गया और अब चार महीने बाद अंतिम संस्कार निकाला जा रहा है.






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