Manjit Singh Bedi Arrested: अमेरिका से कनाडा के रास्ते भारत भागा FBI का ‘मोस्ट वांटेड’ जालसाज जालंधर में गिरफ्तार; अमेरिकी सरकार से 6 लाख डॉलर की ठगी का आरोप
Manjit Singh Bedi Arrested
यूएस फूड स्टैंप (SNAP) योजना में 5 करोड़ रुपये से अधिक के गबन के आरोपी 65 वर्षीय मंजीत सिंह बेदी को पंजाब पुलिस ने दबोचा; एफबीआई निदेशक ने गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि की।
अमेरिका से कनाडा के रास्ते भारत भागा FBI का ‘मोस्ट वांटेड’ जालसाज जालंधर में गिरफ्तार; अमेरिकी सरकार से 6 लाख डॉलर की ठगी का आरोप
जालंधर के अमन नगर का रहने वाला मंजीत सिंह बेदी एफबीआई की सूची में था शामिल; अंतरराष्ट्रीय प्रत्यर्पण और कानूनी औपचारिकताओं पर प्रक्रिया शुरू।
जालंधर। पंजाब पुलिस की कमिश्नरेट टीम ने एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता हासिल करते हुए अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई (FBI) के ‘मोस्ट वांटेड’ भगोड़े मंजीत सिंह बेदी को जालंधर से गिरफ्तार किया है। 65 वर्षीय बेदी पर संयुक्त राज्य अमेरिका के कृषि विभाग (USDA) की पूरक पोषण सहायता योजना (SNAP) में 6 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 5 करोड़ भारतीय रुपये) से अधिक की वित्तीय धोखाधड़ी का आरोप है। कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए बेदी अमेरिका से कनाडा होते हुए भारत भाग आया था, जहां वह जालंधर में छिपकर रह रहा था। अमेरिकी संघीय जांच ब्यूरो (FBI) के शीर्ष अधिकारियों ने इस गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि करते हुए भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समन्वय की सराहना की है।
जालंधर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मंजीत सिंह बेदी जालंधर के गुलाब देवी रोड स्थित अमन नगर का निवासी है। अमेरिका में रहने के दौरान वह एक किराना (ग्रोसरी) स्टोर का संचालन करता था। अमेरिकी संघीय अभियोजकों के अनुसार, बेदी ने अधिकृत स्नैप (SNAP) योजना के तहत मिलने वाले सरकारी फूड कूपन और इलेक्ट्रॉनिक बेनिफिट ट्रांसफर (EBT) कार्ड्स को खाद्य सामग्री देने के बजाय कमीशन काटकर नकद पैसे में भुनाया।
इस अवैध तरीके से उसने अमेरिकी संघीय सरकार को कम से कम 6 लाख डॉलर का चूना लगाया। अमेरिका में आपराधिक मामला दर्ज होने और गिरफ्तारी वारंट जारी होने के तुरंत बाद बेदी वहां से फरार हो गया और अवैध रूप से सीमा पार कर कनाडा के रास्ते भारत पहुंच गया। जालंधर पुलिस को खुफिया सूचना मिली थी कि आरोपी परागपुर क्षेत्र में देखा गया है, जिसके बाद पुलिस टीम ने जाल बिछाकर उसे गिरफ्तार कर लिया।
मामले की पृष्ठभूमि
अमेरिका की स्नैप (SNAP) योजना कम आय वाले परिवारों को बुनियादी पोषण और खाद्य सामग्री खरीदने के लिए आर्थिक सहायता देती है। नियमों के अनुसार, इन लाभों को नकद में नहीं बदला जा सकता। अमेरिकी जांच में सामने आया कि बेदी अपने स्टोर के जरिए लाभार्थियों से कार्ड स्वाइप कराता था, उन्हें 50 से 60 प्रतिशत नकद राशि देता था और शेष पूरी सरकारी राशि खुद हड़प लेता था।
अमेरिकी कृषि विभाग की विशेष जांच विंग ने जब इस रैकेट का भंडाफोड़ किया, तो बेदी को मुख्य आरोपी बनाया गया। लेकिन मुकदमे का सामना करने से पहले ही वह फरार हो गया। इसके बाद एफबीआई ने उसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय वारंट जारी किया और उसे अपनी मोस्ट वांटेड भगोड़ों की सूची में शामिल कर दिया।
जांच में अब तक क्या सामने आया?
- गिरफ्तारी की प्रक्रिया: जालंधर पुलिस ने आरोपी को परागपुर इलाके से पकड़ा। शुरुआती पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह अमेरिकी कानून से बचने के लिए भारत लौटा था।
- फर्जी यात्रा दस्तावेज: पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी ने कनाडा और भारत में प्रवेश के दौरान पहचान छिपाई या फर्जी यात्रा दस्तावेजों का उपयोग किया।
- अमेरिकी अधिकारियों का बयान: एफबीआई मुख्यालय ने पुष्टि की है कि बेदी की गिरफ्तारी अंतरराष्ट्रीय सूचना-साझाकरण प्रणाली और पंजाब पुलिस के त्वरित समन्वय का परिणाम है।
- स्थानीय संपत्तियां: पंजाब पुलिस और केंद्रीय वित्तीय एजेंसियां आरोपी द्वारा भारत में अपराध की आय (Proceeds of Crime) से खरीदी गई संपत्तियों और बैंक खातों की पड़ताल कर रही हैं।
आरोप और बचाव
- अमेरिकी जांच एजेंसियों के आरोप: एफबीआई और यूएसडीए का आरोप है कि बेदी ने एक सुनियोजित वित्तीय गिरोह चलाया, जिसने अमेरिकी करदाताओं के धन और गरीबों के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजना का दुरुपयोग किया।
- बचाव पक्ष का पक्ष: आरोपी के परिजनों और कानूनी प्रतिनिधियों का कहना है कि यह एक व्यावसायिक विवाद था और बेदी को गलत तरीके से फंसाया गया है। वे भारतीय अदालतों में अपने मुवक्किल के कानूनी अधिकारों की रक्षा करेंगे।
(कानूनी सिद्धांत: किसी भी अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय मामले में अदालत का अंतिम फैसला आने तक आरोपी को दोषी नहीं माना जा सकता और उसे निष्पक्ष सुनवाई का पूरा विधिक अधिकार है।)
कानूनी स्थिति
आरोपी पर अमेरिका में वायर फ्रॉड, सरकारी धन की चोरी और स्नैप बेनिफिट्स की अवैध तस्करी के गंभीर संघीय आरोप हैं। वर्तमान में पंजाब पुलिस ने उसे एहतियातन हिरासत में लेकर सक्षम न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया है। भारत और अमेरिका के बीच मौजूदा प्रत्यर्पण संधि (Extradition Treaty) के तहत, विदेश मंत्रालय (MEA) और केंद्रीय गृह मंत्रालय के माध्यम से प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
परिवार और समाज पर असर
यह मामला दर्शाता है कि विदेशों में वित्तीय धोखाधड़ी करके भारत भाग आने वाले आर्थिक अपराधियों के लिए अब छिपना आसान नहीं रह गया है। पंजाब के युवाओं और एनआरआई (NRI) समुदाय के बीच इस घटना ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां और भारतीय पुलिस वित्तीय अपराधों को लेकर जीरो-टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही हैं।
अब आगे क्या?
- अमेरिकी दूतावास और एफबीआई की ओर से भारत सरकार को औपचारिक प्रत्यर्पण अनुरोध (Extradition Request) सौंपा जाएगा।
- पटियाला हाउस कोर्ट, नई दिल्ली में प्रत्यर्पण अदालत के समक्ष आरोपी को पेश किए जाने की संभावना है।
- भारतीय सुरक्षा एजेंसियां यह जांच पूरी करेंगी कि भारत में रहने के दौरान किन लोगों ने उसे शरण और लॉजिस्टिक सहायता प्रदान की।
