संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में 2028-29 की अवधि के लिए अस्थायी सदस्यता पाने के भारत के दावे पर अब चीन की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। चीन ने कहा है कि वह भारत की उम्मीदवारी से जुड़ी खबरों पर नजर रख रहा है. यह बयान ऐसे समय आया है जब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने न्यूयॉर्क में भारत के चुनाव अभियान की औपचारिक शुरुआत की है. जबकि अमेरिका, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन पहले से ही संयुक्त राष्ट्र में भारत की बड़ी भूमिका का समर्थन करते रहे हैं.
भारत के दावे पर चीन का बयान
गुरुवार को जब चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान से भारत की उम्मीदवारी पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि चीन ने इस संबंध में आई खबरों पर ध्यान दिया है. हालांकि, उन्होंने भारत के समर्थन या विरोध को लेकर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की.
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जयशंकर ने शुरू किया चुनाव प्रचार
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान 2028-29 के लिए यूएनएससी की अस्थायी सदस्यता के लिए चुनाव अभियान की शुरुआत की। इस दौरान कई देशों के राजदूत और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि संयुक्त राष्ट्र के प्रति भारत का दृष्टिकोण शांति, विश्वास, नियमों के प्रति सम्मान और ईमानदारी पर आधारित है. उन्होंने यह भी बताया कि निर्वाचित होने पर भारत सुरक्षा परिषद में किन प्राथमिकताओं पर काम करेगा।
स्थाई सदस्यता पर चीन अब भी चुप
चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी और वीटो शक्ति प्राप्त देशों में शामिल है, लेकिन उसने अभी तक सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का खुलकर समर्थन नहीं किया है. दूसरी ओर, अमेरिका, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन कई बार भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन कर चुके हैं।
ताजिकिस्तान से मुकाबला होगा
यूएनएससी के 2028-29 कार्यकाल के लिए चुनाव अगले साल जून में होंगे। भारत एशिया-प्रशांत समूह में एक सीट के लिए ताजिकिस्तान से प्रतिस्पर्धा करेगा। भारत इससे पहले 2021-22 में सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका है। इसके अलावा भारत 1950-51, 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85, 1991-92 और 2011-12 में भी इस परिषद का सदस्य रहा है।
भारत UNSC में सुधार की मांग दोहराता रहा है
भारत लंबे समय से कहता रहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना लगभग 80 साल पुरानी है और इसमें आज की वैश्विक चुनौतियों के अनुरूप सुधार की जरूरत है। भारत का मानना है कि विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, ताकि वैश्विक फैसलों में उनकी भागीदारी बढ़ सके। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने भी कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में चल रहे संघर्षों के दौरान सुरक्षा परिषद प्रभावी भूमिका नहीं निभा पाई है. इसलिए, संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक संस्थानों में सुधार समय की मांग है।






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