जेजेडी प्रमुख तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी को लेकर बिहार में नया विवाद खड़ा हो गया है. सोमवार (जुलाई 27, 2026) को उनकी वकील निशा सिंह ने उनकी गिरफ्तारी की कानूनी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए बड़ा दावा किया।
निशा सिंह ने कहा कि एफआईआर दर्ज होने से पहले ही तेज प्रताप को हिरासत में ले लिया गया था. उन्होंने कहा कि जल्द ही कोर्ट में जमानत याचिका दायर की जा रही है और मेडिकल आधार पर भी राहत मांगी गई है.
वकील निशा सिंह ने कहा कि तेज प्रताप यादव के खिलाफ कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिसमें सबसे गंभीर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109 (हत्या का प्रयास) का आरोप है. उनका दावा है कि एफआईआर दर्ज होने से पहले ही गिरफ्तारी कर ली गई, जो कानूनी प्रक्रिया के मुताबिक नहीं है. उन्होंने कहा कि एफआईआर जल्दबाजी में दर्ज की गई थी और उस समय कथित पीड़िता की चोट के संबंध में कोई मेडिकल रिपोर्ट उपलब्ध नहीं थी।
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जमानत याचिका दाखिल की जाएगी
निशा सिंह के मुताबिक बचाव पक्ष जल्द ही कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल करेगा. उनका कहना है कि गिरफ्तारी और एफआईआर की प्रक्रिया में गंभीर कानूनी खामियां हैं, जिसे कोर्ट के सामने रखा जाएगा. उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी और केस दर्ज करने की प्रक्रिया कानून के मुताबिक अपनाई जानी चाहिए और इसी आधार पर कोर्ट से राहत मांगी जाएगी.
स्वास्थ्य का मुद्दा भी उठा
वहीं, यह भी बताया गया कि तेज प्रताप यादव कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं. उन्हें उच्च रक्तचाप, मधुमेह और अन्य बीमारियाँ हैं। इसे देखते हुए उनकी ओर से एक अलग याचिका दायर की गई है, जिसमें उचित चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने और निरंतर चिकित्सा निगरानी की मांग की गई है.
अब निगाहें कोर्ट पर हैं
तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी के बाद मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है. फिलहाल आरोपों की सत्यता और गिरफ्तारी की वैधता पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा. वहीं, इन दावों पर पुलिस या जांच एजेंसी की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
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