सुप्रीम कोर्ट ने दहेज हत्या और विवाहित महिलाओं के खिलाफ क्रूरता से जुड़े मामलों में सुनवाई में तेजी लाने के उद्देश्य से एक बहुत जरूरी हस्तक्षेप किया है। निचली अदालतों से ऐसे मामलों को प्राथमिकता देने, तीन साल से अधिक समय से लंबित मामलों की पहचान करने और आरोपपत्र दाखिल होने के 60 से 90 दिनों के भीतर आरोप तय करने का प्रयास करने को कहा गया है। अदालतों से स्थगन को कम करने, गवाह कैलेंडर तैयार करने और यह सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया गया है कि साक्ष्य “जहाँ तक संभव हो” लगातार दर्ज किए जाएं। उच्च न्यायालयों से अपेक्षा की जाती है कि वे पुराने मामलों की निगरानी और अलर्ट जारी करने के लिए डिजिटल अदालत प्रबंधन प्रणालियों का उपयोग करें।
