भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित करने के बाद पाकिस्तान परेशान है. पहले उसने भारत से समझौते को बहाल करने की अपील की थी, लेकिन दिल्ली का रुख साफ होने के बाद अब वह असमंजस में है. पाकिस्तान के सांसद, मंत्री और बड़े नेता दुनिया के अलग-अलग मंचों पर इस संधि को बचाने की गुहार लगा रहे हैं और धमकी भी दे रहे हैं.
सिंधु समझौते पर पाकिस्तान के इस्लामाबाद में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया. इसमें पाकिस्तान के कई मंत्री, सांसद और अंतरराष्ट्रीय कानून एवं जल विशेषज्ञ शामिल हुए. इस सम्मेलन का उद्देश्य यह पता लगाना था कि भारत के फैसले के खिलाफ विश्व समर्थन कैसे हासिल किया जाए। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता बिलावल भुट्टो जरदारी ने फिर भड़काऊ बात कही है.
सिंधु जल संधि PAK के लिए कोई मेहरबानी नहीं: बिलावल
बिलावल भुट्टो ने कहा, ‘सिंधु जल संधि पाकिस्तान पर कोई मेहरबानी नहीं थी, बल्कि यह दोनों देशों के बीच एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है.’ पीपीपी प्रमुख ने कहा कि सिंधु जल समझौते का सम्मान किया जाना चाहिए.
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दुनिया की किसी भी संधि पर सवाल उठेंगे: मलिक
पाकिस्तान के पर्यावरण मंत्री मुसद्दिक मलिक ने सिंधु जल संधि की वकालत करते हुए कहा, ‘अगर कोई शक्तिशाली देश किसी अंतरराष्ट्रीय संधि को एकतरफा निलंबित कर सकता है, तो दुनिया में किसी भी संधि की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे.’ उन्होंने कहा कि सिंधु जल समझौता दुनिया के सबसे मजबूत अंतरराष्ट्रीय समझौतों में से एक है.
इशाक डार ने भारत को धमकी दी
इस सम्मेलन में पाकिस्तान के डिप्टी पीएम और विदेश मंत्री इशाक डार ने भारत को धमकी दी है. उन्होंने कहा, ‘सिंधु जल संधि सिर्फ जल बंटवारे का समझौता नहीं है, बल्कि दक्षिण एशिया में शांति, स्थिरता और सहयोग के लिए एक मजबूत आधार है।’ उन्होंने कहा कि साझा जल संसाधनों को कभी भी हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए।
सेमिनार, “सिंधु जल संधि: क्षेत्रीय शांति और स्थिरता का एक साधन” को संबोधित करना सौभाग्य की बात थी, जहां पाकिस्तान और विदेशों के प्रमुख विशेषज्ञों ने दक्षिण एशिया में हमारे समय की परिभाषित चुनौतियों में से एक पर चर्चा की।
मैंने रेखांकित किया कि सिंधु जल संधि नहीं है…
– इशाक डार (@MIshaqDar50) 30 जून, 2026
इशाक डार ने कहा, ‘अगर पाकिस्तान के अधिकारों से समझौता किया गया तो इसका असर पूरे क्षेत्र की शांति और करीब दो अरब लोगों के हितों पर पड़ेगा.’
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