70वीं BPSC का फाइनल रिजल्ट शनिवार (20 जून, 2026) को जारी कर दिया गया। रिजल्ट आते ही बांका जिले के रजौन प्रखंड में उस वक्त खुशी की लहर दौड़ गयी, जब करसानी गांव के एक ही परिवार के दो चचेरे भाई-बहन अपने पहले ही प्रयास में बीपीएससी अधिकारी बन गये. गौरव कुमार सत्यार्थी और कुमारी स्वयं प्रभा ने इस कठिन परीक्षा को पास कर जिले का नाम रौशन किया है. दोनों का चयन आरडीओ/बीडीओ पद के लिए हुआ है.
इस दोहरी सफलता के बाद उनके परिजनों, शिक्षक समुदाय और पूरे गांव समाज में जश्न का माहौल है. घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
इस परीक्षा में 700वीं रैंक हासिल करने वाले गौरव कुमार सत्यार्थी के माता-पिता सत्यार्थी कुमार केशव और रेशमी कुमारी दोनों शिक्षक हैं. गौरव की प्रारंभिक शिक्षा बहुत अच्छी रही। उन्होंने 2013 में डीपीएस भागलपुर से 10वीं की परीक्षा और 2015 में जेवीएम श्यामली, रांची से 12वीं की परीक्षा पास की। इसके बाद उन्होंने कोलकाता के प्रसिद्ध जादवपुर विश्वविद्यालय से बी.टेक (सिविल इंजीनियरिंग) पूरा किया और वर्ष 2020 से भारतीय रेलवे निर्माण में सहायक प्रबंधक के रूप में कार्यरत थे।
गौरव यूपीएससी के इंटरव्यू तक पहुंचे
इससे पहले गौरव ने देश की सबसे कठिन यूपीएससी परीक्षा में इंटरव्यू राउंड तक का सफर तय किया था, जहां बहुत कम अंतर से चूकने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. आज उन्होंने पहले ही प्रयास में बीपीएससी क्रैक कर अपनी काबिलियत साबित कर दी।
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वहीं, गौरव की चचेरी बहन कुमारी स्वयंप्रभा ने भी 1286वीं रैंक हासिल कर आरडीओ/बीडीओ पद पर अपनी जगह पक्की की है. स्वयंप्रभा के पिता जयशंकर प्रसाद विद्यार्थी भी पेशे से शिक्षक हैं और उनके पूरे परिवार में हमेशा शिक्षा का माहौल रहा है। स्वयंप्रभा ने 2014 में उपरामा हाई स्कूल से 10वीं और 2016 में डीएन सिंह कॉलेज, भुसिया से 12वीं की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने बीएससी की। वर्ष 2019 में एसएम कॉलेज भागलपुर से बॉटनी ऑनर्स और फिर वर्ष 2022 में उसी कॉलेज से बीएड की डिग्री हासिल की।
अपनी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर उन्हें BPSC TRE 2.0 (शिक्षक बहाली परीक्षा) में सफलता मिली और वर्तमान में वह भागलपुर जिले के सुल्तानगंज ब्लॉक के उदाडीह हाई स्कूल में कक्षा 9-10 की विज्ञान शिक्षिका के रूप में कार्यरत थीं। स्कूल में बच्चों को पढ़ाने की व्यस्त जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने बीपीएससी की तैयारी के लिए समय निकाला और पहले ही मौके में अधिकारी बनने का गौरव हासिल किया। एक ही शिक्षक परिवार के इन दो होनहार छात्रों ने साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो नौकरी में भी पहली बार में बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।
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