बिहार सरकार ने गन्ना उद्योग को नई ऊंचाई देने के लिए बिहार गन्ना उद्योग निवेश प्रोत्साहन नीति-2026 को मंजूरी दे दी है. इस नीति के तहत प्रदेश में 25 नई चीनी मिलें स्थापित की जाएंगी। केंद्र सरकार की मदद से इस सेक्टर में भारी निवेश आने वाला है.
गन्ना उद्योग मंत्री संजय पासवान ने कहा कि 20 नवंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार आएंगे और दो नये चीनी मिलों का शिलान्यास करेंगे. इनमें मधुबनी की सकरी चीनी मिल और दरभंगा की रैयाम चीनी मिल शामिल हैं.
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नीति के प्रमुख प्रावधान:
- नई चीनी मिल स्थापित करने हेतु 70 करोड़ रूपये तक का पूंजीगत अनुदान
- डिस्टिलरी और इथेनॉल यूनिट पर 5 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी
- सह-विद्युत उत्पादन इकाई पर 15 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी
- संपीड़ित बायोगैस संयंत्र पर विशेष अनुदान
- भूमि आवंटन में बड़ी रियायत
बंद मिलों का भी कायाकल्प होगा
गोपालगंज जिले के सासामुसा चीनी मिल (2021-22 से बंद) के किसानों को बकाया गन्ना मूल्य के रूप में 43 करोड़ रुपये के भुगतान की मंजूरी दी गई है. मुजफ्फरपुर के मोतीपुर चीनी मिल की 266 एकड़ जमीन वापस ली जा रही है, जहां नये चीनी मिल के साथ गन्ना अनुसंधान केंद्र भी बनाया जायेगा.
किसानों को राहत मिलेगी
पेराई सत्र 2025-26 में प्रदेश की चीनी मिलों ने गन्ना किसानों को शत प्रतिशत गन्ना मूल्य (2137.83 करोड़ रुपये) का भुगतान कर दिया है. मुख्यमंत्री गन्ना विकास कार्यक्रम के तहत बीज विकास योजना, गन्ना यांत्रिकीकरण योजना और गन्ना नर्सरी योजना के लिए भी करोड़ों रुपये स्वीकृत किये गये हैं.
सरकार ने गन्ना उत्पादन बढ़ाने के लिए कोयंबटूर गन्ना प्रजनन संस्थान, वसंतदादा चीनी संस्थान पुणे और आईआईटी पटना के साथ समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए हैं। इनके जरिए आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया जाएगा. यह नीति बिहार के गन्ना किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है. नई मिलों से रोजगार बढ़ेगा, किसानों की आय बढ़ेगी और राज्य का गन्ना उद्योग मजबूत होगा।
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