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भरत तिवारी का एनकाउंटर या हत्या? बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे का बड़ा बयान

भारत भूषण तिवारी के एनकाउंटर पर बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने प्रतिक्रिया दी है. शनिवार (जून 20, 2026) को उन्होंने अपने सोशल मीडिया से लाइव आकर बड़ा बयान दिया। इस पूरी घटना पर पुलिस और सरकार को कटघरे में खड़ा किया गया है.

पूर्व डीजीपी ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला किसी भी तरह से असली पुलिस मुठभेड़ का नहीं बल्कि सीधे तौर पर हत्या का मामला लग रहा है. भारत भूषण की पृष्ठभूमि के बारे में बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वह कोई चोर, डकैत, डाकू, आतंकवादी या नक्सली नहीं थे, बल्कि एक बीएससी पास युवक थे, जो जवैनिया गांव के विस्थापित लोगों और बाढ़ पीड़ितों की समस्याओं के लिए लगातार सोशल मीडिया पर आवाज उठा रहे थे।

‘पुलिस या सिस्टम का दुरुपयोग…’

पूर्व डीजीपी के मुताबिक, सिस्टम और प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ लड़ते-लड़ते वह हताश होकर मानसिक रूप से असंतुलित और पागल हो गए थे, लेकिन पुलिस या सिस्टम को गाली देना कभी इतना बड़ा अपराध नहीं हो सकता कि किसी को गोली मारनी पड़े.

गुप्तेश्वर पांडे ने कहा कि वीडियो में साफ दिख रहा है कि भारत भूषण और पुलिस बल के बीच की दूरी 200 मीटर से अधिक थी, क्योंकि साधारण पिस्तौल की मारक क्षमता अधिकतम 30 मीटर तक होती है, इसलिए इतनी दूरी पर खड़ी और आधुनिक हथियारों से लैस पुलिस टीम को कोई वास्तविक खतरा नहीं था. युवक ने अपना हथियार फेंककर आत्मसमर्पण कर दिया था, ऐसे में एक निहत्थे व्यक्ति पर गोलियां बरसाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरा दाग लगाता है।

पुलिस द्वारा जारी विज्ञप्ति में उन्हें ‘पागल’ बताए जाने के बावजूद उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर वह मानसिक रूप से बीमार हैं तो प्रशासन को यह साबित करना होगा कि उनका इलाज कहां चल रहा है.

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पूर्व डीजीपी ने राज्य सरकार की कार्रवाई को अपर्याप्त बताया और कहा कि सिर्फ चार पुलिसकर्मियों को निलंबित करने से न्याय नहीं मिलेगा. जब सरकार कहती है कि किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा तो यह नियम वर्दीधारी अपराधियों पर भी समान रूप से लागू होना चाहिए।

‘FIR दर्ज होनी चाहिए…गिरफ्तारी होनी चाहिए’

उन्होंने मांग की है कि इस घटना में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ तुरंत हत्या की एफआईआर दर्ज की जाए और उन्हें गिरफ्तार कर नौकरी से बर्खास्त किया जाए. साथ ही इस पूरे मामले में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश की निगरानी में एसआईटी जांच करायी जाये और स्पीडी ट्रायल के माध्यम से दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाये.

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