भरत तिवारी के घर पहुंचे एसपी, परिवार के सामने पिघल गया दिल! बोले- ‘हम सुनने आए हैं…’

भोजपुर के चर्चित भारत भूषण तिवारी मुठभेड़ मामले में बुधवार (जून 23, 2025) की देर रात पुलिस अधीक्षक (एसपी) राज पहली बार बिलौटी गांव पहुंचे और परिजनों से बातचीत की. इस दौरान उन्होंने परिवार की सारी बातें सुनीं और जांच का आश्वासन दिया.

इस मौके पर एसपी ने परिजनों से कहा, ”दिल में बहुत कुछ है, कुछ है तो बताओ, हम अपनी बात कहने नहीं, बल्कि सुनने आये हैं.” एसपी राज ने परिजनों से बात की और फिर चले गये. उन्होंने मीडिया से कोई बात नहीं की.

मां ने कहा- हमें सिर्फ न्याय चाहिए

इस मौके पर भरत तिवारी की मां आशा देवी ने बताया कि उन्होंने एसपी से साफ कहा कि उनकी सबसे बड़ी मांग सीबीआई जांच और दोषियों को सजा दिलाना है. उन्होंने कहा कि एसपी ने आश्वासन दिया है कि जांच निष्पक्ष होगी और जो भी दोषी होंगे, उन्हें सजा दी जायेगी.

आशा देवी ने कहा कि परिवार को अब पुलिस पर भरोसा नहीं रहा. सुरक्षा मुहैया कराने की बात पर भी उन्होंने एसपी से कहा कि ‘हमें उन लोगों से डर लगता है.’ इस पर एसपी ने आश्वासन दिया कि सुरक्षा व्यवस्था और जांच दोनों उनकी निगरानी में होगी. आशा देवी ने दोहराया कि हमारी मांग है कि मेरे बेटे की हत्या करने वाले को फांसी की सजा दी जाए.

यह भी पढ़ें- पटना कोचिंग विवाद: खान सर की अग्रिम जमानत पर कोर्ट का बड़ा फैसला, राहत बरकरार रहेगी

भाई चंदन ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि हथियार फेंकने के बाद गोली क्यों मारी गयी? भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी ने बताया कि एसपी ने घटना से जुड़े सभी पहलुओं पर उनसे बात की. चंदन के मुताबिक, इस सवाल पर एसपी ने कहा कि इस बिंदु समेत पूरी घटना की जांच की जायेगी.

भाभी ने सुरक्षा का मुद्दा उठाया

भरत तिवारी की भाभी ने बताया कि एसपी ने परिवार की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा की. उन्होंने कहा कि परिवार लगातार डर का माहौल महसूस कर रहा है. भाभी के मुताबिक, एसपी ने आश्वासन दिया कि सुरक्षा और जांच दोनों पर खुद नजर रखी जाएगी.

बातचीत के दौरान हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में गठित जांच टीम का भी जिक्र हुआ. परिवार ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा है और उम्मीद है कि निष्पक्ष जांच के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी.

बातचीत के दौरान भरत के पिता ने घटना से जुड़े कई गंभीर सवाल भी उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि घटना वाले दिन सबसे पहले उन्हें वीडियो कॉल पर उनके बेटे को दिखाया गया और बताया गया कि उसका इलाज चल रहा है, लेकिन बाद में उन्हें उसकी मौत की जानकारी मिली. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर उस वक्त मौत हो चुकी थी तो इलाज की बात क्यों की गई?

यह भी पढ़ें- बिहार टेंडर घोटाले में 4 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल, आईएएस संजीव हंस समेत कई बड़े नाम फरार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *