भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में बुधवार (24 जून) को आयोजित महापंचायत में भारत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आया. महापंचायत में शामिल परिजनों, ग्रामीणों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. इस दौरान भरत तिवारी के परिवार की ओर से बिहार सरकार को सात दिनों का अल्टीमेटम दिया गया.
परिवार का कहना है कि अगर तय समय के अंदर दोषी अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार नहीं किया गया और पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला तो वे बड़े पैमाने पर जन आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे. महापंचायत में यह भी संकेत दिया गया कि आंदोलन का दायरा सिर्फ भोजपुर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे पूरे बिहार और देश के अन्य हिस्सों तक ले जाया जाएगा.
भरत तिवारी मामले में FIR के बाद बढ़ा दबाव!
महापंचायत का आयोजन ऐसे समय में किया गया जब एक दिन पहले ही भरत तिवारी की मां की शिकायत पर शाहपुर थाने में एनकाउंटर मामले को लेकर एफआईआर दर्ज की गई थी. पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जारी सूचना के मुताबिक, मृतक की मां के आवेदन के आधार पर संबंधित अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. हालांकि, परिजनों का कहना है कि सिर्फ एफआईआर दर्ज करना ही काफी नहीं है, दोषियों की गिरफ्तारी भी जरूरी है.
चचेरे भाई ने नौकरी से इस्तीफा देने की घोषणा की
महापंचायत को संबोधित करते हुए भरत तिवारी के चचेरे भाई बूमरा तिवारी ने भावुक होकर कहा, ”परिवार लगातार न्याय के लिए संघर्ष कर रहा है, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है.” उन्होंने दावा किया कि उनका चयन बिहार पुलिस में हो गया था, लेकिन भरत तिवारी की मौत से आहत होकर उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला किया है.
उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्य की मौत ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है और अब उनका पूरा ध्यान न्याय की लड़ाई पर होगा. उन्होंने लोगों से आंदोलन का समर्थन करने की भी अपील की.
श्राद्ध तक गिरफ्तारी नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन होगा
महापंचायत में मौजूद ग्रामीण पंकज त्रिपाठी ने कहा कि इस कार्यक्रम में देश के कई राज्यों से लोग शामिल होने आये थे. उन्होंने कहा, ”दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों के बीच चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया है कि यदि भरत तिवारी के श्राद्ध तक नामित आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल नहीं भेजा गया तो उसके बाद आंदोलन का नया चरण शुरू होगा.”
उन्होंने कहा कि श्राद्ध के बाद विधानसभा का घेराव, मुख्यमंत्री आवास का घेराव और जरूरत पड़ी तो आंदोलन को दिल्ली के जंतर-मंतर तक ले जाने की तैयारी की जायेगी. उन्होंने कहा कि अगर सरकार आरोपी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करती है तो आंदोलन की जरूरत नहीं पड़ेगी, लेकिन अगर लीपापोती की गयी तो संघर्ष तेज होगा.
मोबाइल बरामदगी को दिए अहम सबूत
महापंचायत में भरत तिवारी के मोबाइल फोन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा. पंकज त्रिपाठी ने बताया कि घटना के दौरान भरत तिवारी द्वारा बनाया गया लाइव वीडियो और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी मोबाइल में मौजूद थी. उनका आरोप है कि मोबाइल पुलिस के कब्जे में है और मामले की जांच के लिए उसकी बरामदगी बेहद जरूरी है.
उन्होंने कहा कि मोबाइल से जुड़े डिजिटल साक्ष्य सामने आने पर पूरे मामले की सच्चाई स्पष्ट हो सकती है. उन्होंने दावा किया कि वैज्ञानिक तकनीक के जरिए डिलीट किए गए डेटा को भी वापस लाया जा सकता है, इसलिए मोबाइल की रिकवरी और उसकी फोरेंसिक जांच जरूरी है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच पर भी सवाल
महापंचायत में मौजूद लोगों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक न किए जाने पर भी सवाल उठाए. वक्ताओं ने आशंका जताई कि रिपोर्ट में तथ्य छिपाने की कोशिश हो सकती है. हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ग्रामीणों ने पारदर्शी जांच की मांग दोहराई है.
इसके अलावा राज्य सरकार की ओर से घोषित न्यायिक जांच को लेकर भी सवाल उठाए गए. लोगों ने कहा कि जांच की घोषणा तो कर दी गयी है, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि जांच कौन करेगा, इसकी समय सीमा क्या होगी और रिपोर्ट कब आयेगी.
बिल्ली के बच्चे ने न्याय की माँग दोहराई।
महापंचायत के दौरान पूरे इलाके में न्याय की मांग को लेकर नारे लगाए गए. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। बैठक में भरत तिवारी को न्याय दिलाने, दोषियों की गिरफ्तारी, डिजिटल साक्ष्य की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की गयी.
फिलहाल परिवार और समर्थकों ने सरकार को एक हफ्ते का वक्त दिया है. अब सबकी नजर इस पर है कि आने वाले दिनों में प्रशासन और सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है. अगर परिजनों की मांगें पूरी नहीं हुईं तो भोजपुर से शुरू हुआ यह आंदोलन बिहार की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है.
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