रिशु श्री टेंडर घोटाला मामले में राजद नेता तेजस्वी यादव (तेजस्वी यादव) एनडीए सरकार को घेरा है. सोमवार (जून 29, 2026) को तेजस्वी यादव ने इस पूरे घोटाले को लेकर सरकार से 20 सवालों के जवाब मांगे हैं।
राजद नेता ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर लिखा, ”21 साल पुरानी एनडीए सरकार को बिहार के हजारों करोड़ रुपये के रिशु श्री महाघोटाले पर हमारे सवालों का जवाब देना चाहिए.”
नीचे पढ़ें तेजस्वी यादव के 20 सवाल
1) एक छोटा ठेकेदार (रिशु श्री) कैसे कई विभागों के टेंडर को अपनी मनमर्जी से मैनेज कर रहा था? इतने वर्षों तक सरकार की निगरानी प्रणाली क्या कर रही थी? या फिर अधिकारियों द्वारा व्यक्तिगत लाभ के लिए सब कुछ नजरअंदाज किया जा रहा था?
2) ईडी की जांच में सामने आए चैट से पता चलता है कि कैसे रिशु श्री के कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के प्रभावशाली कॉकस को सत्ता और शीर्ष अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त था। उन्होंने किसकी शह पर अधिकारियों को निर्देश दिये?
3) क्या बड़ी मछलियाँ आरोप पत्र से बाहर हैं? क्या ऐसा करने में देरी के पीछे कोई राजनीतिक दबाव है या सत्ता में बैठे लोगों को खुद पकड़े जाने का डर है?
4) दो आईएएस अधिकारी निलंबित लेकिन आरोपपत्र में नाम नहीं? उसे तुरंत गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? क्या सरकार को उनसे सबके पत्ते खोलने की धमकी मिली है? सत्ता द्वारा संरक्षित और पोषित भ्रष्ट लोगों को सजा से छूट क्यों दी जाती है?
5) वित्त विभाग के तत्कालीन संयुक्त सचिव, जल संसाधन एवं भवन निर्माण विभाग के इंजीनियरों की गिरफ्तारी के बाद क्या सरकार ने समीक्षा की है कि उन्होंने अब तक कितने करोड़ की सरकारी राशि का बंदरबांट किया है? और यदि हाँ, तो इस राशि को सार्वजनिक करने में देरी क्यों हो रही है?
6) आरोपी रिशु श्री पहले ही तय कर लेता था कि ठेका किसे मिलेगा और उसी हिसाब से विभागीय टेंडर के मापदंड बदल देता था. क्या इस सिंडिकेट के नेता मुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री कार्यालय और आवास में बैठे अधिकारी थे और हैं?
7) जांच में पता चला है कि सरकारी विभागों में बिल पास करने और टेंडर देने के लिए 2% से 3.5% तक का तय कमीशन लिया जाता था. क्या यह भ्रष्टाचार के प्रति “जीरो टॉलरेंस” के नग्न सरकार के दावों की धज्जियां नहीं उड़ा रहा है?
8) क्या सरकार रिशुश्री और उससे संबंधित कंपनियों को दिए गए सभी टेंडरों की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराएगी?
9) क्या यह संयोग है कि सभी लाभार्थी कंपनियाँ गुजरात से हैं और इसलिए इसे बचाया जा रहा है?
10) यह बात सामने आई है कि अधिकारियों और उनके परिवारों की विदेश यात्राओं, हवाई टिकटों और महंगे उपहारों का खर्च रिशु श्री ने उठाया था. इस वित्तीय लेनदेन से गृह विभाग, ईओयू, निगरानी और खुफिया विभाग क्यों अनजान थे?
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11) छापेमारी के दौरान रिशु श्री के पास से 99 संपत्तियों के कागजात और करोड़ों की नकदी/आभूषण बरामद किये गये. बिहार की जनता जानना चाहती है कि राज्य के बजट का बड़ा हिस्सा एक ठेकेदार के पास कैसे चला गया?
12) सरकार केवल “छोटी मछलियों” और कुछ चुनिंदा अधिकारियों को बलि का बकरा बना रही है। इस सिंडिकेट के शीर्ष पर बैठे असली राजनीतिक आकाओं और “अमृत” पीने वाले अधिकारियों के नाम कब सामने लाये जायेंगे?
13) जिन विभागों में यह महाघोटाला हुआ वहां के विभागीय मंत्रियों ने अब तक अपनी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा क्यों नहीं दिया?
14) सरकार को सारी जानकारी उपलब्ध होने के बाद भी एक साल से अधिक का समय लग गया। ED के अनुरोध के बावजूद बिहार पुलिस ने महीनों तक FIR दर्ज क्यों नहीं की? क्या यह देरी सबूतों को नष्ट करने, “प्रियजनों” की रक्षा करने और फाइलों को दबाने के लिए की गई थी?
15) क्या कुछ अधिकारी इस घोटाले को दबाने के लिए अन्य हथकंडे अपना रहे हैं? रिशु श्री के खिलाफ बिहार सरकार के वकील कोर्ट में क्यों नहीं आये?
16) टेंडर माफिया रिशु श्री ने कोसी बेसिन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट और कोसी बैराज का ठेका गुजरात की कंपनी को दिलाने में मदद की थी. बिहार की बाढ़ नियंत्रण और सुरक्षा से जुड़ी इतनी संवेदनशील परियोजना में इतनी आसानी से भ्रष्टाचार कैसे हो रहा है?
17) क्या सरकार का पूरा आंतरिक ऑडिट सिस्टम और सतर्कता विभाग पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है जो इतने बड़े घोटाले का समय रहते पर्दाफाश नहीं कर सकता या हर कोई किसी न किसी तरह से इस भ्रष्टाचार में शामिल है?
18) जब राज्य में सब कुछ ई-टेंडरिंग के माध्यम से होता है, तो भाजपा-जदयू सरकार द्वारा पोषित टेंडर माफिया सिंडिकेट डिजिटल पोर्टल में हेरफेर और प्रबंधन कैसे कर रहा था?
19) एसवीयू ने 4000 पन्नों की चार्जशीट में केवल 7 मुख्य आरोपियों को नामित किया है और कहा है कि अन्य के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं। यह बाकी प्रभावशाली अधिकारियों और नेताओं को “क्लीन चिट” देने की जल्दबाजी नहीं तो और क्या है?
20) इसे संयोग कहें या एनडीए का प्रयोग, अगर तमाम बड़े घोटालों में दबाव के चलते किसी प्रशासनिक अधिकारी को दिखावे के लिए गिरफ्तार करना पड़ता है या उसे बलि का बकरा बनाना पड़ता है तो फिर सिर्फ दलित-पिछड़े और मुस्लिम समुदाय के अधिकारी को ही क्यों?
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