हाल के दिनों में भारत-पाकिस्तान की ट्रैक-2 डिप्लोमेसी की काफी चर्चा हो रही है। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि भारत और पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों के बीच श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में मुलाकात हुई है. भारत सरकार के सूत्रों ने इन खबरों का खंडन किया है और कहा है कि इसमें कोई सच्चाई नहीं है. पाकिस्तान के राजनीतिक विश्लेषक कमर चीमा ने भी कहा है कि नरेंद्र मोदी सरकार शायद ही बातचीत का रास्ता चुनेगी.
कमर चीमा ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीति से जुड़ी खबरों के बाद यह सवाल पूछा जा रहा है कि क्या दोनों देशों के बीच सबकुछ ठीक होने वाला है. इसकी वजह ये है कि हाल के दिनों में आरएसएस पाकिस्तान से बातचीत की वकालत कर रहा है. कुछ भारतीय सैन्य अधिकारियों ने भी रिश्ते सुधारने पर जोर दिया है.
कमर चीमा ने कहा कि फिलहाल भारत पाकिस्तान से बात नहीं करेगा. इसका कारण मुझे नरेंद्र मोदी सरकार की नीति ही लगती है. नरेंद्र मोदी सरकार ने लगातार पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रुख दिखाया है और पाकिस्तान को आतंकवादी देश करार दिया है. ऐसे में पाकिस्तान के साथ बातचीत की मेज पर आना उनके लिए राजनीतिक नुकसान का कारण बन सकता है.
पाकिस्तान बातचीत के लिए तैयार- चीमा
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का रुख साफ है कि वह बातचीत के लिए तैयार है. फिलहाल पाकिस्तानी सेना और वहां की सरकार पूरी तरह से एकमत नजर आ रही है. कमर चीमा ने यह भी कहा कि पाकिस्तान और भारत को बातचीत से पूरी तरह दूर नहीं रहना चाहिए. ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत चल रही है, जिनके बीच 50 साल से राजनयिक संबंध नहीं हैं, तो पाकिस्तान और भारत के बीच युद्धों के दौरान भी किसी न किसी तरह से आपसी समझ बनी हुई है. ऐसे में भारत और पाकिस्तान को बातचीत में दिक्कत क्यों होनी चाहिए?
‘सिंधु जल संधि में कोई छूट नहीं’
सूत्रों के मुताबिक, केंद्र की मोदी सरकार ने पाकिस्तान के साथ किसी भी आधिकारिक ट्रैक-2 वार्ता को न तो मंजूरी दी है और न ही समर्थन दिया है. उन्होंने सिंधु जल संधि के तहत किसी भी छूट या रियायत की संभावना को भी पूरी तरह से खारिज कर दिया है. उनका कहना है कि हवाई क्षेत्र से जुड़े मुद्दों या अन्य द्विपक्षीय तनावों के बावजूद भारत का रुख पहले जैसा ही है.
ये भी पढ़ें
‘ईरानी सेना का होर्मुज पर नियंत्रण, हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा’, अराघची ने ट्रंप को सुनाई खरी-खोटी






Leave a Reply