एनकाउंटर मामला: फॉरेंसिक जांच के लिए भेजी गई SHO,STF जवान और भरत तिवारी की पिस्टल, खुलेगा राज!

भारत भूषण तिवारी एनकाउंटर (भारत भूषण तिवारी एनकाउंटर) मामले की जांच अब वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाई जा रही है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच एजेंसियों ने मुठभेड़ में इस्तेमाल हुए सभी प्रमुख हथियारों की फोरेंसिक और बैलिस्टिक जांच शुरू कर दी है।

कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद मुठभेड़ में शामिल तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष और वर्तमान में निलंबित इंस्पेक्टर राजेश मालाकार की सर्विस पिस्टल, एसटीएफ जवान अक्षय कुमार की सरकारी पिस्टल और भारत भूषण तिवारी के पास से बरामद पिस्टल को पटना स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) भेज दिया गया है. इनके साथ ही मौके से बरामद खोखे, जिंदा कारतूस और अन्य भौतिक साक्ष्य भी जांच के लिए भेजे गए हैं.

इस जांच का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य यह पता लगाना है कि भरत तिवारी को लगी गोलियां किस हथियार से चली थीं, घटनास्थल पर मिले कारतूस किस पिस्तौल से चले थे और पुलिस और भरत द्वारा की गई गोलीबारी का वास्तविक क्रम क्या था। इस पूरे मामले में बैलिस्टिक रिपोर्ट को सबसे अहम वैज्ञानिक सबूत माना जा रहा है.

एसटीएफ जवान ने चार राउंड फायरिंग करने का दावा किया है

पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के मुताबिक, मुठभेड़ के दौरान भारत भूषण तिवारी ने पुलिस टीम पर लगातार फायरिंग की. पुलिस का दावा है कि उसने करीब 10 से 12 राउंड फायरिंग की. जवाबी कार्रवाई में तत्कालीन शाहपुर थाना प्रभारी राजेश मालाकार ने अपनी सर्विस पिस्टल से एक राउंड फायरिंग की, जबकि एसटीएफ जवान अक्षय कुमार ने आत्मरक्षा में चार राउंड फायरिंग की.

एफआईआर के मुताबिक, एसटीएफ जवान की गोली लगने से भरत तिवारी घायल होकर गिर पड़े. पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई है. अब जांच एजेंसियां ​​यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि पुलिस द्वारा चलाई गई इन पांच गोलियों में से कौन भरत को लगी और क्या मौके से मिले सबूत पुलिस के दावों की पुष्टि करते हैं।

मुठभेड़ के बाद एफएसएल टीम ने मौके से एक पिस्टल, मैगजीन, दो जिंदा कारतूस और दो खोखा बरामद किया था. पुलिस का दावा है कि यही पिस्टल भारत भूषण तिवारी के पास थी और इसी से पुलिस टीम पर फायरिंग की गयी थी.

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अब इस पिस्टल की बैलिस्टिक टेस्टिंग भी की जा रही है. एफएसएल इस बात की जांच करेगी कि मौके से मिले खोखे इसी पिस्टल से चले थे या नहीं. इसके अलावा पिस्तौल की कार्यशील स्थिति, उसमें प्रयुक्त कारतूस और फायरिंग के तकनीकी पहलुओं की भी जांच की जाएगी। इससे यह स्पष्ट करने का प्रयास किया जाएगा कि वास्तव में भरत की ओर से कितनी फायरिंग हुई थी।

तीनों हथियारों का मिलान किया जाएगा

एफएसएल को भेजे गए तीन हथियार – निलंबित थानाध्यक्ष की सर्विस पिस्टल, एसटीएफ जवान की सर्विस पिस्टल और भरत तिवारी के पास से बरामद पिस्टल – का घटनास्थल पर मिले खोखे और कारतूस से वैज्ञानिक तरीके से मिलान किया जाएगा। बैलिस्टिक विशेषज्ञ प्रत्येक हथियार का परीक्षण करेंगे और उसके बैरल पर मौजूद विशिष्ट चिह्नों की तुलना घटनास्थल पर पाए गए गोले और गोलियों से करेंगे। इससे यह पता चल सकेगा कि कौन सा खोखा किस पिस्तौल से आया और किस हथियार से चली गोली से कौन प्रभावित हुआ।

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