पीएम मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे. भारत की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ईरान जाएंगे. इसे लेकर विदेश मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने कहा कि मोदी सरकार अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में बहुत निचले स्तर का प्रतिनिधिमंडल भेज रही है जो कई दिनों तक चलेगा.
ब्रह्मा चेलानी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘जब 2024 में ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो गई, तो भारत ने अपने उपराष्ट्रपति को उनके अंतिम संस्कार में भेजा था, लेकिन अब मोदी सरकार कई दिनों तक चलने वाले अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में बहुत निचले स्तर का प्रतिनिधिमंडल भेज रही है। खामनेई की हत्या अमेरिका और इजराइल ने की थी. खामेनेई न केवल ईरान के आध्यात्मिक नेता थे, बल्कि देश के प्रमुख भी थे।
जब 2024 में ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो गई, तो भारत ने अपने उपराष्ट्रपति को अंतिम संस्कार के लिए भेजा। लेकिन अब मोदी सरकार अली खामेनेई, जिनकी अमेरिका द्वारा हत्या कर दी गई थी, के बहु-दिवसीय राजकीय अंतिम संस्कार में निचले स्तर का प्रतिनिधित्व भेज रही है…
– डॉ. ब्रह्मा चेलानी (@चेलानी) 29 जून, 2026
सरकार का झुकाव अमेरिका-इजरायल की ओर?
उन्होंने कहा कि यह फैसला दिखाता है कि ईरान युद्ध में हमलावर देशों के प्रति मोदी सरकार का झुकाव अभी भी बना हुआ है. ऐसा प्रतीत होता है कि उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल न भेजकर नई दिल्ली का इरादा वाशिंगटन और तेल अवीव को नाराज न करने का है।
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सरकार का तर्क क्या हो सकता है?
ब्रह्मा चेलानी ने कहा कि सरकार यह तर्क दे सकती है कि वह समुद्री पड़ोसी के रूप में ईरान के साथ भारत के ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों का सम्मान करने के लिए अपने प्रतिनिधिमंडल को संतुलित कर रही है। साथ ही, वह किसी भी हाई-प्रोफाइल राजनीतिक कदम से बच रहा है जो वाशिंगटन और तेल अवीव के साथ संबंधों को जटिल बना सकता है। हालाँकि, आलोचक इस निर्णय को इस बात के प्रमाण के रूप में देखेंगे कि भारत अमेरिका और इज़राइल को अपनी ईरान नीति को प्रभावित करने की अनुमति दे रहा है।
अमेरिका-इजरायल हमले में खामेनेई की मौत हो गई थी
आपको बता दें कि इसी साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी. जिसके बाद ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर लगातार मिसाइलें दागीं और होर्मुज को बंद कर दिया, जिससे दुनिया भर में तेल की कमी हो गई. अब अमेरिका और ईरान के बीच डील को लेकर बातचीत चल रही है.
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