भरत तिवारी एनकाउंटर केस: एनडीए में फूट! बिहार में दो केंद्रीय मंत्री, दो बयान, अलग-अलग राजनीतिक संदेश

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर अब एनडीए में साफ तौर पर फूट दिख रही है. बिहार का कोई भी मंत्री भरत तिवारी के परिवार से मिलने बिलौटी गांव नहीं गया, लेकिन आज (03 जुलाई) केंद्रीय मंत्री और एलजेपी (आर) प्रमुख चिराग पासवान भरत के गांव गए और श्रद्धांजलि दी.

उन्होंने भरत के परिजनों से मुलाकात की और इस एनकाउंटर को गलत बताया. साथ ही कहा कि परिवार को न्याय दिलाना हमारी प्राथमिकता है. वहीं एनडीए के एक और नेता केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का बयान बिल्कुल अलग रहा है.

जीतन राम मांझी भरत एनकाउंटर को सही बताते रहे

जबकि केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी पहले दिन से ही भरत तिवारी के एनकाउंटर को सही ठहरा रहे हैं. वे भरत तिवारी को अपराधी बता रहे हैं. आज भी उन्होंने एनकाउंटर को सही ठहराया और कहा, ”चिराग पासवान जो करें वो मैं ही करूं ये जरूरी नहीं है.”

चिराग का बिलौटी गांव जाने का प्लान तय नहीं था!

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का पहले से कोई कार्यक्रम तय नहीं था. कल उन्होंने दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और आज वे बिलौटी पहुंचे. राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि क्या चिराग पासवान गृह मंत्री अमित शाह का कोई संदेश लेकर भरत के परिवार से मिले हैं?

क्या चिराग को कोई संदेश लेकर भरत के घर भेजा गया था?

एक बात तो साफ और समझने वाली है कि चिराग पासवान को एक संदेश देकर भेजा गया है. क्योंकि अभी तक भरत तिवारी की ही जाति के किसी मंत्री ने उनके घर आने की जरूरत महसूस नहीं की है. वहीं देशभर में ब्राह्मण समाज इस एनकाउंटर से नाराज है. हाल ही में देश के अलग-अलग इलाकों में प्रदर्शन भी हुए. बिहार से कोई मंत्री भी नहीं गया, लेकिन ऐसा करने का साहस कर चिराग ने एक तरह से सम्राट चौधरी की कुर्सी को कटघरे में खड़ा कर दिया है.

भरत तिवारी का एनकाउंटर 17 जून को बिलौटी गांव में हुआ था.

17 जून को भोजपुर के बिलौटी गांव में भरत तिवारी का एनकाउंटर कर दिया गया था. यहां तक ​​कि जिस एसडीपीओ यानी पुलिस उपाधीक्षक पर आरोप लगे थे उन्हें हटाने और दोबारा पदस्थापित करने के फैसले को भी गलत बताया गया है.

5 जुलाई को आयोजित हुई बहुजन महापंचायत

बहरहाल, भरत तिवारी के एनकाउंटर की न्यायिक जांच कराई जा रही है. रिपोर्ट अभी तक पेश नहीं की गई है, लेकिन इस पर शुरू हुई राजनीति ने बिहार में सरकार और व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं और राज्य में दबी हुई जाति की राजनीति को भी पुनर्जीवित कर दिया है। 5 जुलाई को बहुजन महापंचायत का आयोजन किया गया है. जिसमें गैर-सवर्ण नेताओं को बुलाया गया है. हालांकि, यह कार्यक्रम कहां होना है, इसकी इजाजत नहीं मिली है.

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