रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने ईरान की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान के लिए किसी परमाणु हथियार से कम नहीं है. उनके मुताबिक हालिया संघर्ष के दौरान ईरान ने इस अहम समुद्री रास्ते पर अपना नियंत्रण दिखाकर पूरी दुनिया को अपनी ताकत का एहसास कराया.
मेदवेदेव खामनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने आये थे
दिमित्री मेदवेदेव ने तेहरान में अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के बाद यह बयान दिया। सोशल मीडिया पर उनके बयान के कुछ अनुवादों में ‘अर्मेनियाई जलडमरूमध्य’ और बाद में ‘मालदीव जलडमरूमध्य’ जैसे शब्द आए, लेकिन कई रिपोर्टों और पूरे संदर्भ से यह स्पष्ट है कि उनका इशारा होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर था, जो ईरान और ओमान के बीच स्थित है।
‘ईरान के पास परमाणु हथियार जैसा एक और हथियार’
मेदवेदेव ने कहा, ‘ईरान ने असली परमाणु हथियार की जगह एक ऐसा हथियार खोज लिया है जो उससे कम नहीं है और वह है होर्मुज जलडमरूमध्य.’ उन्होंने कहा कि इस समुद्री मार्ग का बेहद खास अंतरराष्ट्रीय महत्व है, क्योंकि इसके एक तरफ ईरान है और दूसरी तरफ ओमान है.
‘ईरान ने जलडमरूमध्य पर नियंत्रण दिखाकर दिखाई ताकत’
रूसी नेता ने कहा कि हालिया युद्ध के दौरान ईरान ने इस समुद्री मार्ग पर नियंत्रण करके अपनी भूराजनीतिक शक्ति का प्रदर्शन किया था. उन्होंने कहा, ‘आंदोलन रोककर ईरान ने दिखा दिया है कि उसकी ताकत कितनी बड़ी है. अब भविष्य में यह जलडमरूमध्य कैसे संचालित होगा, इस पर चर्चा और समझौते किए जा रहे हैं।
सैन्य संघर्ष में होरमुज़ एक बड़ा हथियार बन सकता है
मेदवेदेव ने इसकी तुलना न्यूक्लियर डिटरेंस से करते हुए कहा कि युद्ध की स्थिति में होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान के लिए बेहद कारगर रणनीतिक हथियार साबित हो सकता है. उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि ईरान के पास न सिर्फ परमाणु हथियार हैं बल्कि थर्मोन्यूक्लियर हथियार जैसी ताकत भी है और वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है, जिसका इस्तेमाल सैन्य संघर्ष के दौरान किया जा सकता है.’
हजारों लोगों ने खामेनेई को अंतिम विदाई दी
मेदवेदेव का यह बयान ऐसे समय आया है जब अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए हजारों लोग तेहरान के इमाम खुमैनी ग्रैंड मस्जिद में एकत्र हुए थे। काले कपड़े पहने लोगों ने हाथों में तस्वीरें लेकर खमेनेई और उनके परिवार के सदस्यों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान पूरे परिसर में ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ के नारे भी गूंजे.
अंतिम संस्कार में विदेशी मेहमान भी शामिल हुए
खामनेई और उनके परिवार के कई सदस्यों के ताबूत अंतिम दर्शन के लिए रखे गए थे. इससे पहले आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में ईरान के वरिष्ठ अधिकारी और कई विदेशी प्रतिनिधि भी शामिल हुए, जिसमें दिमित्री मेदवेदेव भी मौजूद थे.
अंतिम संस्कार का कार्यक्रम एक सप्ताह तक चलेगा
ईरान में खामेनेई की अंतिम यात्रा से जुड़े कार्यक्रम पूरे सप्ताह जारी रहेंगे. इसके बाद उन्हें मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। इस दौरान इराक के क़ोम और शिया पवित्र शहरों नजफ़ और कर्बला में भी धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.
होर्मुज स्ट्रेट पर दुनिया की नजर
हाल ही में ईरान-अमेरिका-इज़राइल संघर्ष के बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य पूरी दुनिया के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक बन गया है। युद्ध के दौरान ईरान ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर नियंत्रण दिखाया था, जिसके कारण वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में भारी वृद्धि हुई थी।
हालांकि, अमेरिका की मध्यस्थता से हुए सीजफायर के बाद हालात कुछ हद तक सामान्य हो गए हैं. अब शोक की अवधि ख़त्म होने के बाद इस समुद्री मार्ग के भविष्य और स्थायी व्यवस्था को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरू होने की संभावना है.






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