भरत तिवारी केस: गवाहों के बयान होंगे दर्ज, समन भेजे जाने शुरू, रिटायर जज बोले- ‘पहले जांच…’

भरत तिवारी एनकाउंटर (भरत तिवारी एनकाउंटर) मामले की न्यायिक जांच ने औपचारिक रूप से गति पकड़ ली है. न्यायिक जांच आयोग का कार्यालय आरा स्थित जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) कार्यालय परिसर में स्थापित किया गया है. आयोग के अध्यक्ष सह पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा बुधवार (08 जुलाई, 2026) को कार्यालय पहुंचे. अधिकारियों के साथ बैठक के बाद मामले में आगे की जांच शुरू कर दी गई है. सरकार ने आयोग को पूरे मामले की जांच कर छह महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी दी है.

मीडिया से बात करते हुए जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा ने कहा कि जांच का पहला उद्देश्य पूरी पृष्ठभूमि, घटनाओं के अनुक्रम और उन प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष परिस्थितियों की जांच करना है जिनके कारण घटना हुई। दूसरा महत्वपूर्ण बिंदु 17 जून को शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की जांच करना और यदि आवश्यक हो तो संबंधित अधिकारियों और कर्मियों की जिम्मेदारी तय करना है।

सेवानिवृत्त जज ने बताया कि कुछ दिन पहले वह खुद बिलौटी गांव गये थे और पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी. उन्होंने कहा कि आयोग के कामकाज के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होने में कुछ समय लगा, जिसके बाद अब जांच औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई है.

बताया गया कि आयोग ने गवाहों को समन जारी करना भी शुरू कर दिया है और जल्द ही महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे। विनोद कुमार सिन्हा ने कहा कि उनका प्रयास होगा कि प्रमुख गवाहों की गवाही जल्द पूरी हो सके और अंतरिम रिपोर्ट भी समय पर सरकार को उपलब्ध करायी जा सके.

कोर्ट में भरत के परिवार का बयान दर्ज

इधर, न्यायिक जांच शुरू होने के साथ ही भरत तिवारी के परिवार की भी आरा व्यवहार न्यायालय में पेशी हुई. पुलिस सुरक्षा के बीच भरत तिवारी के परिजन (मां आशा देवी, भाई चंदन तिवारी और भाभी सुमन देवी) कोर्ट पहुंचे, जहां न्यायाधीश के समक्ष उनका बयान दर्ज कराया गया.

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कोर्ट से बाहर आने के बाद भरत तिवारी की मां आशा देवी भावुक हो गईं. उन्होंने कहा कि उन्होंने शुरू से अंत तक पूरी घटना जज के सामने रखी है. उन्होंने कहा कि उनका बेटा समाज सेवा करता था और ऐसे ही एक युवक को कई बार गोली मारी गयी. आशा देवी ने कहा कि उन्होंने कोर्ट से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है.

उन्होंने दोहराया कि परिवार को बिहार पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं है. उनके मुताबिक अब न्यायिक प्रक्रिया से ही न्याय मिलने की उम्मीद है. भरत की भाभी सुमन देवी ने कहा कि सच्चाई सामने आएगी और जो भी तथ्य होंगे, उन्हें जांच के दौरान सामने रखा जाएगा.

परिवार ने एक बार फिर अपनी पूर्व घोषित मांग दोहराई और कहा कि अगर न्याय की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो 9 जुलाई से आमरण अनशन शुरू किया जाएगा. परिवार का कहना है कि उनकी मांग सिर्फ निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है.

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