अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के बीच ईरान के भीतर भी रणनीति को लेकर मतभेद सामने आने लगे हैं. सबसे बड़ा विवाद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। एक तरफ ईरान का शक्तिशाली सैन्य संगठन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) अमेरिका के खिलाफ सख्त रुख अपना रहा है और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए रखने की वकालत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान की सरकार राजनयिक तरीकों से तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने के पक्ष में दिख रही है।
ईरान के भीतर दो अलग-अलग रणनीतियाँ
सौफ़ान सेंटर के वरिष्ठ विश्लेषक केनेथ काट्ज़मैन का कहना है कि मौजूदा स्थिति में, ईरान की सत्तारूढ़ प्रणाली के भीतर दो अलग-अलग दर्शन काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक, आईआरजीसी के शीर्ष कमांडरों और कट्टरपंथी गुट का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बनाए रखना ईरान की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत है और इसके जरिए अमेरिका पर दबाव डाला जा सकता है।
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आईआरजीसी का लक्ष्य- अमेरिका को कड़ा जवाब देना
विश्लेषक के मुताबिक, आईआरजीसी का मकसद सिर्फ होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना कब्जा बरकरार रखना नहीं है. कट्टरपंथी गुट मारे गए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का भी बदला लेना चाहता है। उनका मानना है कि अमेरिका को ऐसी प्रतिक्रिया दी जानी चाहिए कि वह भविष्य में ईरान के खिलाफ किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई करने से पहले दो बार सोचे.
पेज़ेशकियान सरकार बातचीत से समाधान चाहती है
दूसरी ओर, राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बकर ग़ालिबफ़ जैसे नागरिक नेता सैन्य टकराव को आगे बढ़ाने के बजाय बातचीत को बेहतर विकल्प मान रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि चुनी हुई सरकार चाहती है कि ओमान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर बातचीत शुरू हो, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके.
ओमान मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है
विश्लेषकों के मुताबिक तेहरान की नागरिक सरकार को उम्मीद है कि ओमान दोनों देशों के बीच बातचीत बहाल करने में अहम भूमिका निभा सकता है. सरकार बातचीत के ज़रिए ऐसा रास्ता ढूंढने की कोशिश कर रही है जिससे क्षेत्रीय तनाव कम हो सके और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर आम सहमति बन सके.
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अमेरिका ने भी अपना रुख दोहराया
इस बीच अमेरिका ने भी साफ कर दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखना उसकी राष्ट्रीय और रणनीतिक प्राथमिकताओं में से है. वाशिंगटन का कहना है कि यह समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल व्यापार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और यदि इसे बंद करने या नेविगेशन को बाधित करने का कोई प्रयास किया गया तो कड़ी प्रतिक्रिया दी जाएगी।
दुनिया की नजरें वैश्विक व्यापार पर भी हैं
होर्मुज जलडमरूमध्य को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री लाइनों में से एक माना जाता है। ऐसे में ईरान के भीतर रणनीति को लेकर उभरते मतभेद और अमेरिका के साथ बढ़ता तनाव सिर्फ दो देशों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया के तेल बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।






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