इंग्लैंड के खिलाफ पहले वनडे में शुबमन गिल ने साबित कर दिया है कि वह भारतीय कप्तान बनने के लिए बेहतरीन विकल्प क्यों हैं। कुछ दिन पहले श्रेयस अय्यर की कप्तानी में भारतीय टी20 टीम इंग्लैंड से बुरी तरह हार गई थी, लेकिन वनडे आते ही गिल ने ऐसा दिमाग चलाया कि इंग्लिश बल्लेबाज धराशायी हो गए.
दरअसल, भारतीय गेंदबाज पहले 12 ओवर में एक भी विकेट नहीं ले पाए. लेकिन गेंद 12 ओवर पुरानी होने के बाद भी तेज गेंदबाजी के लिए मददगार थी, यही कारण है कि गिल ने एक-एक करके जसप्रीत बुमराह, गुरनूर बरार और प्रसिद्ध कृष्णा की मदद से इंग्लैंड पर आक्रमण किया. नतीजा ये हुआ कि अगली 26 गेंदों के अंदर इंग्लिश टीम के पांच विकेट गिर गए.
शुबमन गिल का ‘मास्टरप्लान’
इंग्लैंड ने पहले 12 ओवर में 61 रन बनाए थे और कप्तान ने 12वें ओवर में पहली बार स्पिनर (वाशिंगटन सुंदर) को गेंद सौंपी. लेकिन पिछला ओवर शिवम दुबे ने फेंका, जिन्होंने पहली ही गेंद पर जैकब बेथेल को हरा दिया. हालांकि उस गेंद पर चौका आया. लेकिन यहां से कप्तान शुबमन गिल को अंदाजा हो गया कि अभी स्पिनरों को ज्यादा मदद नहीं मिलेगी, इसलिए 13वें ओवर में उन्होंने गेंद वापस गुरनूर बरार को सौंप दी, जिन्होंने अपने पहले 2 ओवर में 26 रन दिए थे. बरार ने गिल को निराश नहीं किया और एक ही ओवर में जैकब बेथेल और बेन डकेट को आउट कर दिया.
इंग्लैंड के बल्लेबाजों पर दबाव बढ़ता देख कप्तान ने अगले ही ओवर में जसप्रीत बुमराह को वापस बुला लिया. जब बुमराह वापस आए तो उन्होंने पहली ही गेंद पर सबसे खतरनाक बल्लेबाज हैरी ब्रूक को आउट कर दिया, जो सिर्फ एक रन बना सके. अगले 2 ओवर में कोई विकेट नहीं आया, लेकिन इंग्लिश बैटिंग पूरी तरह दबाव में थी.
गिल ने एक चाल चली
कप्तान गिल का बुमराह और गुरनूर बरार पर लगाया गया दांव सही साबित हुआ. फिर 17वें ओवर में प्रसिद्ध कृष्णा वापस आए, जिन्होंने लगभग शुरुआत से ही टप्पा पकड़कर बल्लेबाजों को मात देने का काम किया था. कृष्णा को आख़िरकार 17वें ओवर में सफलता मिली, जब उन्होंने जोस बटलर को गुरनूर बरार के हाथों कैच करा दिया. इसी ओवर में उन्होंने सैम कुरेन को आउट किया.
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श्रेयस अय्यर को सबक सीखना चाहिए
ये बात किसी से छुपी नहीं है कि श्रेयस अय्यर ने टी20 सीरीज के दौरान कई गलत फैसले लिए. दूसरे टी20 में इंग्लैंड को आखिरी 4 ओवर में 49 रन बनाने थे. अय्यर ने 17वां ओवर स्पिनर रवि बिश्नोई को सौंपा, जिन्होंने ओवर में 29 रन दिए. जहां उस समय हर्षित राणा के पास 2 ओवर थे, वहीं अर्शदीप सिंह के पास भी एक ओवर बचा हुआ था. पूरी सीरीज में गेंदबाजी में बदलाव को लेकर अय्यर ने गलत फैसले लिए.
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