बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने सोमवार (13 जुलाई) को प्रवक्ताओं की सूची जारी कर दी है। इस लिस्ट ने सभी को चौंका दिया. दरअसल, प्रवक्ताओं की सूची में किसी दलित-मुस्लिम को मौका नहीं दिया गया है.
इसमें से इस बार नीतीश कुमार का लव-कुश समीकरण भी गायब नजर आ रहा है. कयास लगाए जा रहे हैं कि सूची में नीतीश कुमार का जिक्र नहीं है. दरअसल, जेडीयू में हमेशा से मुस्लिमों और दलितों को तवज्जो दी जाती रही है, लेकिन इस बार बदलते समीकरणों ने सभी को हैरान कर दिया है.
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इन नेताओं को मिला पार्टी में मौका
जेडीयू ने प्रवक्ता की जिम्मेदारी भारती मेहता, नवल शर्मा, मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार, निहोरा प्रसाद, पूजा शर्मा, अभिषेक झा, चंदन कुमार, अनुप्रिया यादव और शंभू शरण सिंह को दी है. अगर इन नामों को जातिगत एंगल से देखा जाए तो 3 भूमिहार, 2 यादव, 1 ब्राह्मण, 1 राजपूत और 1 अति पिछड़ा वर्ग-ईसाई जाति से एक-एक नेता को प्रवक्ता बनाया गया है. पार्टी ने इन सभी को पार्टी का प्रतिनिधित्व करने, देश के किसी भी मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त करने और बुरी परिस्थितियों में पार्टी का बचाव करने के लिए नियुक्त किया है।
प्रवक्ता किस जाति का है?
नये प्रवक्ताओं की सूची में नीरज यादव भूमिहार, भारती मेहता अति पिछड़ी, निहोरा यादव यादव जाति से हैं. वहीं अभिषेक झा ब्राह्मण, नवल शर्मा भूमिहार, पूजा शर्मा ईसाई, अनुप्रिया यादव, चंदन कुमार सिंह राजपूत और शंभूनाथ सिंह भूमिहार जाति से आते हैं. ऐसे में पार्टी ने जातीय समीकरण के हिसाब से अपने प्रवक्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी है. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि इस बार पार्टी ने मुस्लिमों और दलितों को सूची से किनारे कर दिया है.
पार्टी ने लव-कुश नेताओं को प्रवक्ता की जिम्मेदारी भी नहीं दी है. वहीं राज्य की 16 फीसदी आबादी वाले मुस्लिम नेताओं को भी मौका नहीं मिला है. साथ ही 18 फीसदी दलितों में से एक भी दलित को मौका नहीं दिया गया. ऐसे में पार्टी ने लव-कुश समीकरण, मुस्लिम-दलित को प्रवक्ता नहीं बनाया है.
ये दलित और मुस्लिम नेता थे प्रवक्ता
इससे पहले दलित जाति के हेमराज और महेश दास जेडीयू में प्रवक्ता के पद पर कार्यरत थे. मुस्लिम नेताओं में अंजुम आरा और अकबर अली को यह जिम्मेदारी दी गई. इस तरह से जीतेंद्र पटेल जेडीयू में अपना प्रेम समीकरण बनाए हुए थे. लेकिन इस बार ये पांच नाम लिस्ट से गायब नजर आ रहे हैं.
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