PoK में पाकिस्तान के खिलाफ उबाल, 35वें दिन भी विद्रोह जारी, ‘आजादी’ के नारों से गूंजा रावलकोट

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आज (14 जुलाई) 36वें दिन भी उग्रवाद जारी है। मुजफ्फराबाद में मार्च से ठीक 24 घंटे पहले पाकिस्तानी रेंजर्स ने पीओके के सुधनोती और रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसमें 8 लोगों की मौत हो गई और 11 घायल हो गए. वहीं, रावलकोट में ईदगाह मैदान पर पाकिस्तान के कब्जे के खिलाफ एक बार फिर प्रदर्शनकारियों ने गवाही दी.

विरोध प्रदर्शन के आयोजकों में से एक सरदार अमन खान ने हजारों लोगों के सामने मंच से कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मुताबिक, पीओके एक ‘विवादित क्षेत्र’ है, लेकिन असल में पीओके एक ‘अधिकृत क्षेत्र’ है, यानी उस पर कब्जा है. अमन खान के इस भाषण ने पाकिस्तान के 78 साल पुराने नैरेटिव को ध्वस्त कर दिया. जिसमें पाकिस्तान अपने देश के लोगों और कश्मीरियों को यह समझाता था कि पीओके असल में आजाद कश्मीर है और भारत का जम्मू-कश्मीर ‘मकबूजा’ (कब्जे वाला) कश्मीर है।

70 हजार की भीड़ को संबोधित करते हुए जिसमें ज्यादातर महिलाएं थीं, अमन खान ने कहा, ‘पीओके का भविष्य तय करने का अधिकार सिर्फ पीओके के लोगों को है. साथ ही 8 दशकों से पीओके के स्कूलों में सिखाए जा रहे पाकिस्तान प्रेम के मुद्दे पर अमन खान ने बच्चों से कहा कि पीओके के स्कूलों में जो कुछ भी पढ़ाया जाता है वह गलत है, सिवाय इसके कि पहाड़ी इलाकों में गर्मियों में अधिक गर्मी और सर्दियों में अधिक ठंड होती है.

‘जीत से पहले नहीं रुकेगा ये युद्ध’

आर-पार की लड़ाई से पहले आज (14 जुलाई) रावलकोट में पीओके के पुंछ डिवीजन से लोगों के जुटने का सिलसिला शुरू हो गया है. साथ ही कल (15 जुलाई) मुजफ्फराबाद मार्च पर अमन खान ने कहा कि अब ये जंग जीत से पहले नहीं रुकेगी. पीओके में 27 जुलाई को होने वाले चुनाव पर अमन खान ने कहा, ‘पीओके में ब्रिगेडियर फैक (आईएसआई सेक्टर कमांडर पीओके) के दफ्तर के पीछे कई लोग हाथ में फाइलें लेकर खड़े हैं, लेकिन आईएसआई चुनाव नहीं कराना चाहती, चुनाव जनता कराएगी. जो जानते हैं वे वोट देंगे और वही सरकार स्वीकार की जाएगी जिसे वे जानते हैं कि वोट देंगे।

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पाक सरकार को दी चेतावनी

अमन खान ने पीओके में पाकिस्तान की कठपुतली सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, ‘अब 15 जुलाई को हम सिर्फ एक मांग के साथ मुजफ्फराबाद की ओर बढ़ेंगे और वह मांग है पीओके की जिम्मेदारी पीओके के लोगों को देने की.’ यानी इस इशारे में अमन खान एक बार फिर पीओके की आजादी की बात दोहरा रहे हैं. वैसे अमन खान की तरह ही दूसरे सह-आयोजक उमर नजीर भी पिछले एक हफ्ते में कई बार ये कह चुके हैं कि ’15 जुलाई का मार्च 38 मांगों के लिए या एफआईआर रद्द करने के लिए नहीं बल्कि सिर्फ एक मांग के लिए होगा और वो है पीओके की बागडोर पीओके के लोगों के हाथ में.’

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