युद्ध के बीच ज़ेलेंस्की का बड़ा दांव! विवादास्पद कमांडर मखैलो द्रुपताई यूक्रेन के नए सेना प्रमुख बने

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने एक और बड़ा फैसला लेते हुए सेना प्रमुख (कमांडर-इन-चीफ) को बदल दिया है। रक्षा मंत्री को हटाने के फैसले का विरोध झेल रहे ज़ेलेंस्की ने अब यूक्रेनी सेना की कमान मौजूदा सेना प्रमुख अलेक्जेंडर सिर्स्की की जगह मेजर जनरल मायखाइलो द्रुपताई को सौंप दी है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब यूक्रेन युद्ध के मोर्चे पर लगातार दबाव में है और देश के अंदर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

46 साल के मखाइलो द्रापाताई बने नए सेना प्रमुख

मखाइलो द्रापाताई 46 साल के हैं, जबकि हटाए गए सेना प्रमुख अलेक्जेंडर सिर्स्की 60 साल के हैं और 2024 से सेना की कमान संभाल रहे थे. माना जा रहा है कि ज़ेलेंस्की युवा नेतृत्व के जरिए सेना में नई रणनीति और नई ऊर्जा लाना चाहते हैं.

रक्षा मंत्री को हटाने के बाद विरोध बढ़ा

पिछले हफ्ते ज़ेलेंस्की ने अपनी पूरी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल किया था. इस बदलाव में प्रधानमंत्री यूलिया स्विरिडेंको समेत कई मंत्रियों को हटा दिया गया और रक्षा मंत्री मिखाइल फेडोरोव को भी पद से हटा दिया गया. इसके बाद राजधानी कीव समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गये. पूर्व सैनिकों और आम लोगों ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाए और सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया.

पूर्व रक्षा मंत्री ने सेना की कमजोरियां गिनाईं

पद से हटाए जाने के बाद माखाइलो फेडोरोव ने यूक्रेनी सेना की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि सेना की कई ब्रिगेडों में ढांचागत कमियां हैं और ड्रोन युद्ध को छोड़कर यूक्रेन को ज्यादातर मोर्चों पर नुकसान उठाना पड़ रहा है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सैनिकों की कमी को पूरा करने के लिए लोगों को जबरन सेना में भर्ती किया जा रहा है. फेडोरोव और तत्कालीन सेना प्रमुख सिर्स्की के बीच लंबे समय से मतभेद की खबरें आती रही हैं.

रूस के बढ़ते दबाव के बीच लिया गया फैसला

युद्ध के मैदान में भी यूक्रेन की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है. रूसी सेना डोनबास इलाके में लगातार प्रगति कर रही है और पूरे इलाके पर कब्ज़ा करने की दिशा में आगे बढ़ रही है. इसके अलावा रूसी सेना सुमी और खार्किव इलाके में भी लगातार आगे बढ़ रही है. ऐसे में ज़ेलेंस्की ने सेना की रणनीति में बदलाव के मकसद से नए सेना प्रमुख की नियुक्ति की है.

युद्ध के दौरान दूसरी बार सेना प्रमुख बदला गया

फरवरी 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से यह दूसरी बार है जब ज़ेलेंस्की ने सेना प्रमुख को बदला है। इससे पहले साल 2024 में वालेरी ज़ालुज़नी को हटा दिया गया था और अलेक्जेंडर सिर्स्की को कमान सौंपी गई थी। वर्तमान में ज़ालुज़्नी लंदन में यूक्रेन के राजदूत हैं। नए सेना प्रमुख की नियुक्ति पर उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि मखैलो द्रपताई को बहुत कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा और उनका कार्यकाल उम्मीद से भी अधिक कठिन साबित हो सकता है।

द्रापतई का नाम विवादों से भी जुड़ा रहा है

मखाइलो द्रापाताई पहले यूक्रेन की संयुक्त सेना के कमांडर और जनरल स्टाफ के उप प्रमुख रह चुके हैं। हालाँकि, उनकी पहचान एक युद्ध क्षेत्र कमांडर के रूप में अधिक रही है। उनके नेतृत्व में यूक्रेनी सेना को अब तक कोई बड़ी सैन्य सफलता नहीं मिली है और रूस उन्हें ‘फ़ील्ड कमांडर’ कहकर संबोधित करता है.

2014 की कार्रवाई अभी भी विवादों में है

द्रपताई का नाम पहली बार साल 2014 में चर्चा में आया था, जब वह मेजर के पद पर तैनात थे. उस समय उनकी मशीनीकृत बटालियन को डोनबास के मारियुपोल शहर में विरोध प्रदर्शन और विद्रोह को नियंत्रित करने के लिए भेजा गया था। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को हटाते समय उनके नेतृत्व में बीएमपी (इन्फेंट्री कॉम्बैट व्हीकल) को भीड़ और बैरियरों में घुसा दिया गया। इस घटना का वीडियो आज भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और इसे मारियुपोल में यूक्रेनी सेना की कार्रवाई का प्रतीक माना जाता है.

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रूस इस घटना को प्रोपेगेंडा का आधार बना रहा है

रूस लंबे समय से इस घटना का हवाला देते हुए दावा कर रहा है कि यूक्रेनी सेना ने डोनबास क्षेत्र में रूसी भाषी लोगों पर अत्याचार किया था। फरवरी 2022 में डोनबास पर हुए हमले के कारणों में रूस ने इस तर्क को भी शामिल किया था. फिलहाल मारियुपोल, डोनेट्स्क और लुहान्स्क जैसे इलाके रूस के नियंत्रण में हैं और रूस इन्हें अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है.

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