बिहार के अलग-अलग जिलों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई जारी है. पटना, छपरा, बेगुसराय, सीतामढी समेत अन्य जिलों में पुलिस सीसीटीवी फुटेज के जरिए प्रदर्शनकारियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर रही है. इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की प्रतिक्रिया आई है. कहा गया है कि भरोसा मत तोड़ो.
कॉकरोच जनता पार्टी की पोस्ट, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामले वापस लें।”
प्रिय @samrat4bjp और @SuvenduWB,
@JPNadda और @DrJitenderSingh द्वारा दिया गया आश्वासन मत तोड़ें। प्रदर्शनकारियों पर लगाए गए सभी आपराधिक मामले हटाएं।
– कॉकरोच जनता पार्टी (@CJP_for_India) 26 जुलाई, 2026
आज (सोमवार) सीजेपी की ही एक और एक्स-पोस्ट में लिखा गया है, ”पूरे देश की पुलिस से अनुरोध है कि 25 जुलाई के दिल्ली समझौते का पालन किया जाए और किसी भी छात्र के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई न की जाए.”
यह भी पढ़ें- सीवान में विरोध प्रदर्शन में AK47 चलाने वाला पुलिसकर्मी निलंबित, कई राउंड फायरिंग की
तेजस्वी यादव ने चेतावनी भी दी
समझौते के बाद हो रही गिरफ्तारियों पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी सवाल उठाए हैं. तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी हमला बोला है. उन्होंने चेतावनी दी है कि यह एनडीए सरकार के लिए महंगा पड़ेगा.
7 हत्याओं के आरोपी बिहार के मुख्यमंत्री एक सड़क अपराधी हैं जिन्होंने सभी लोकतांत्रिक परंपराओं को त्याग दिया है और देश में पहली बार विरोध कर रहे छात्रों पर एके -47 से गोलियां चलाईं।
छात्रों से समझौते के बावजूद बिहार में हजारों छात्रों को फर्जी केस के तहत हिरासत में लिया जा रहा है, उनके परिवार…
– तेजस्वी यादव (@yadavtejashwi) 27 जुलाई, 2026
तेजस्वी यादव ने अपने एक्स हैंडल से पोस्ट करते हुए लिखा, “7 हत्याओं के आरोपी बिहार के मुख्यमंत्री सड़क पर हत्या करने वाले अपराधी हैं, जिन्होंने सभी लोकतांत्रिक परंपराओं को त्याग दिया है और देश में पहली बार विरोध कर रहे छात्रों पर AK-47 से गोलियां चलाईं। छात्रों के साथ समझौते के बावजूद बिहार में हजारों छात्रों को फर्जी मामले दर्ज करके हिरासत में लिया जा रहा है, उनके परिवारों को प्रताड़ित किया जा रहा है। अगर छात्रों को रिहा नहीं किया गया, तो यह एनडीए सरकार के लिए महंगा होगा।”
आपको बता दें कि जब सीजेपी ने जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से बातचीत की तो इस बात पर सहमति बनी कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया जाए और मुआवजे के साथ-साथ यह भी मांग की गई कि देश में विरोध प्रदर्शन के दौरान जो भी मामले हुए हैं, उन सभी को रद्द किया जाए. सारी शर्तें मान ली गईं. अब इसके बाद भी अलग-अलग राज्यों में हो रही गिरफ्तारियों पर सियासत तेज हो गई है.
यह भी पढ़ें- छपरा हिंसा पर एक्शन: 186 पर एफआईआर, 2500 अज्ञात; 56 गिरफ्तार






Leave a Reply