हालांकि ईरान के साथ डील अधर में लटकी हुई है, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के बाद रूस-यूक्रेन युद्ध की ओर बढ़ने के संकेत दिए हैं, लेकिन ट्रंप शायद भूल गए हैं कि इन दिनों यूक्रेन के साथ-साथ रूस ने भी इंग्लिश चैनल में ब्रिटेन के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. ऐसे में ट्रंप के लिए विश्व शांति का मसीहा बनने की राह इतनी आसान नहीं दिख रही है.
जी-7 शिखर सम्मेलन में यूक्रेन के सवालों पर क्या बोले ट्रंप?
फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान पत्रकारों द्वारा यूक्रेन पर पूछे गए सवाल पर ट्रंप ने कहा, ‘अब जब ईरान युद्ध खत्म हो गया है, तो अब हम रूस-यूक्रेन युद्ध की ओर रुख करेंगे। अमेरिका और ईरान के बीच फाइनल डील को लेकर 19 जून को जिनेवा में अहम बातचीत होने वाली है. अगर यह डील हो जाती है तो अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी से चल रहा युद्ध और तनाव खत्म हो जाएगा, लेकिन रूस और यूक्रेन के बीच पिछले चार साल से युद्ध जारी है.
पिछले साल रूस-यूक्रेन वार्ता विफल रही थी
पिछले साल अगस्त में अलास्का शिखर सम्मेलन में भी ट्रंप ने पुतिन से युद्ध ख़त्म करने का आह्वान किया था. ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की पर भी दबाव बनाया, लेकिन बात नहीं बनी. पुतिन और ज़ेलेंस्की दोनों अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं. पुतिन ने दो टूक कहा है कि यूक्रेन के कब्जे वाले डोनबास प्रांत को किसी भी कीमत पर वापस नहीं किया जाएगा. साथ ही यूक्रेन को नाटो में शामिल न होने की गारंटी देनी होगी. वहीं, ज़ेलेंस्की भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं और रूस पर हमले जारी रखे हुए हैं।
यूक्रेन ने मॉस्को के पास ड्रोन हमला किया
मंगलवार (16 जून, 2026) को यूक्रेन ने रूस की राजधानी मॉस्को के बेहद करीब एक बड़ी तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमला किया। रूस के कीव में एक मध्ययुगीन चर्च पर हमले के बाद यूक्रेन ने यह हमला किया था. हालांकि, रूस ने हमले से साफ इनकार किया था. रूस ने दावा किया कि ये हमले यूक्रेन के सैन्य ठिकानों पर किए गए. इस दौरान यूक्रेन ने अमेरिका से मिली पैट्रियट मिसाइल का इस्तेमाल किया था, जो खराबी के कारण चर्च पर जा गिरी.
ट्रंप ने पुतिन से फोन पर बात की
14 जून को ईरान के साथ एमओयू पर सहमति जताने से पहले ही ट्रंप ने पुतिन से फोन पर बात की थी और यूक्रेन में युद्ध रोकने पर चर्चा की थी, लेकिन उसी दिन इंग्लैंड ने रूसी शैडो फ्लीट टैंकर को जब्त कर पुतिन को भड़का दिया है. इंग्लैंड को शेष यूरोप से जोड़ने वाले इंग्लिश चैनल (समुद्र) को पार करते समय ब्रिटिश मरीन कमांडो ने एक ऑपरेशन के बाद इस टैंकर को जब्त कर लिया था।
शैडो फ्लीट जब्त होने से रूस नाराज
शैडो फ्लीट की जब्ती से नाराज रूस ने मंगलवार (16 जून, 2026) को इंग्लिश चैनल में इंग्लैंड की एक निजी नौका पर चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं। रूसी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाई गईं क्योंकि ब्रिटिश नौका खतरनाक तरीके से रूसी युद्धपोत के करीब आ गई थी।
जानकारी के मुताबिक, रूसी जहाज ‘आइल ऑफ वाइट’ और ‘नॉरमैंडी’ के बीच अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से गुजर रहा था। उसी समय, ब्रिटिश नौका युद्धपोत के 150 मीटर के भीतर आ गई, तब कमांडर ने नौका के सामने छोटे हथियारों से चेतावनी देने वाली गोलियां चलाने का आदेश दिया।
मामले पर रूसी मंत्रालय ने क्या कहा?
रूसी मंत्रालय ने कहा कि गोलीबारी से पहले चालक दल ने रेडियो के जरिए नौका से संपर्क करने की कोशिश की थी, लेकिन वे असफल रहे. इसके बाद उन्होंने सिग्नल फ़्लेयर छोड़े और सायरन बजाया, लेकिन इन दोनों तरीकों से नौका का रास्ता नहीं बदला जा सका.
साफ है कि ईरान हो या यूक्रेन या फिर यूरोप, ट्रंप के लिए कोई भी राह आसान नहीं है. वैसे भी ईरान से हार के बाद दुनिया ने ट्रंप और अमेरिका को गंभीरता से लेना कम कर दिया है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या रूस, यूक्रेन या इंग्लैंड जैसे यूरोपीय देश ट्रंप की सलाह मानेंगे?
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