सिंधु जल संधि पर भारत के सख्त रुख ने पाकिस्तान की बेचैनी बढ़ा दी है. इस्लामाबाद जहां लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, वहीं पाकिस्तान के पड़ोसी और लंबे समय से प्रतिद्वंद्वी अफगानिस्तान में बड़ी संख्या में सोशल मीडिया यूजर्स भारत के फैसले का खुलकर समर्थन कर रहे हैं। कई अफगानी नागरिकों का कहना है कि भारत को आतंकवाद को संरक्षण देने वाले पाकिस्तान के खिलाफ अपने फैसले पर कायम रहना चाहिए.
अफगान सोशल मीडिया पर भारत के समर्थन में पोस्ट
‘फ़ज़ल अफ़ग़ान’, टीम 93K को रोने दो। आतंकवाद और पानी एक साथ नहीं बह सकते. यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और कई अन्य अफगान यूजर्स भी इसी तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं.
प्रिय भारत, सिंधु जल को रोके रखो। टीम 93K को रोते रहने दो – आतंकवाद और पानी एक साथ नहीं बह सकते।
– फ़ज़ल अफ़ग़ान (@fhzadran) 2 जुलाई, 2026
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’93 हजार’ का जिक्र क्यों?
फजल अफगान ने अपने पोस्ट के साथ एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें भीड़ के बीच कुछ सैन्य वर्दी के पतलून हवा में लहराते नजर आ रहे हैं. पोस्ट में दावा किया गया कि यह वीडियो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) का है, जहां लोग पाकिस्तानी सेना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वीडियो के साथ कैप्शन था, ‘सबकुछ अस्थायी है, लेकिन टीम 93 हजार की पैंट उतारने की रस्म स्थायी है.’
बाकी सब कुछ अस्थायी है, लेकिन टीम 93k का पैंट उतारने का समारोह स्थायी है 😂 pic.twitter.com/SsEtN5DKKO
– फ़ज़ल अफ़ग़ान (@fhzadran) 1 जुलाई, 2026
’93 हजार’ का संदर्भ क्या है?
’93 हजार’ का संदर्भ 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध से संबंधित है। 16 दिसंबर 1971 को लगभग 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में भारतीय सेना और मुक्ति वाहिनी के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। ढाका के रेसकोर्स मैदान पर पाकिस्तान के लेफ्टिनेंट जनरल ए.ए.के. नियाजी ने भारतीय लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के सामने आत्मसमर्पण पत्र पर हस्ताक्षर किये थे.
सिंधु जल संधि पर भारत के फैसले से पाकिस्तान चिंतित
सिंधु जल संधि को लेकर भारत द्वारा अपनाए गए ताजा रुख के बाद पाकिस्तान लगातार इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचने की कोशिश कर रहा है. इस्लामाबाद का कहना है कि अगर संधि बहाल नहीं की गई तो क्षेत्रीय जल सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था प्रभावित हो सकती है.
पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित किया, जहां उसने दावा किया कि सिंधु जल संधि का भविष्य वैश्विक व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। वहीं, पाकिस्तान में गर्मियों के दौरान संभावित जल संकट को लेकर भी चिंता जताई जा रही है.
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भारत ने सीओए के फैसले को खारिज कर दिया
भारत ने हाल ही में सिंधु जल संधि से संबंधित मामले में हेग स्थित मध्यस्थता न्यायालय की कार्यवाही और उसके एकतरफा फैसले को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। भारत का कहना है कि यह प्रक्रिया संधि के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है और उसकी स्थिति पहले से ही स्पष्ट है.






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