झारखंड में दो राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं. विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल होने के बावजूद इंडिया एलायंस अपने दोनों उम्मीदवारों को जीत नहीं दिला सका. चुनाव नतीजे बताते हैं कि इस चुनाव में बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग हुई, जिसका सीधा फायदा एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को मिला.
झारखंड कांग्रेस प्रभारी के राजू ने आरोप लगाया कि राजद और सीपीआई (एमएल) ने पार्टी को धोखा दिया, जिसके कारण कांग्रेस के उम्मीदवार चुनाव हार गये. हालांकि, इस आरोप पर दोनों पक्षों की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए मतदान में सभी 81 विधायकों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. मतगणना में झामुमो प्रत्याशी बैजनाथ राम को 31 मत मिले और वे विजयी घोषित किये गये.
परिमल नथवाणी को 30 मत मिले, दो अवैध
एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवाणी को 30 वोट मिले, जिनमें से दो वोट अवैध घोषित किये गये. इस तरह उन्होंने 28 वैध वोटों के आधार पर जीत हासिल की. कांग्रेस प्रत्याशी प्रणब झा को 20 वोट मिले, जिसमें से एक वोट अवैध हो गया. झारखंड विधानसभा में एनडीए के पास बीजेपी, आजसू, जेडीयू और एलजेपी को मिलाकर कुल 24 विधायक हैं.
इसके बावजूद नाथवाणी को 30 वोट मिलना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि उन्हें विपक्षी खेमे से भी समर्थन मिला है। दो वोट अवैध होने के बावजूद उन्हें जीत के लिए जरूरी 28 वोट मिले. वहीं, इंडिया अलायंस के पास कुल 56 विधायक हैं, जो दोनों सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के लिए काफी थे. झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राजद के चार और सीपीआई (एमएल) के दो विधायक गठबंधन के साथ हैं. इसके बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी प्रणब झा को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला और हार का सामना करना पड़ा.
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कांग्रेस ने सहयोगी दलों पर उठाए सवाल
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कम से कम सात विधायकों ने गठबंधन लाइन से अलग होकर वोट किया. किस पार्टी के विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की, इसकी अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. नतीजों के बाद कांग्रेस ने अपने सहयोगियों पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर झारखंड की राजनीति में क्रॉस वोटिंग की परंपरा को रेखांकित किया है. विधानसभा में संख्या बल कम होने के बावजूद परिमल नथवाणी की जीत ने यह संकेत दे दिया है कि चुनावी गणित में पॉलिटिकल केमिस्ट्री की अहम भूमिका है. वहीं, कांग्रेस उम्मीदवार की हार ने भारत गठबंधन के भीतर समन्वय और विश्वास को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.
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