तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी पर भड़कीं रोहिणी आचार्य, ‘ये कैसा न्याय, जिसमें 7 हत्याएं…’

NEET पेपर लीक मामले में छात्र आंदोलन में शामिल हुए जनशक्ति जनता दल (JJD) प्रमुख तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी पर बिहार की सियासत गरमा गई है. रोहिणी आचार्य भी अपने भाई की गिरफ्तारी से नाराज हैं. उन्होंने इसे सम्राट चौधरी सरकार की तानाशाही करार दिया है. साथ ही आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक विरोधियों को डराने और जन आंदोलनों के प्रभाव को कमजोर करने के लिए प्रशासन और पुलिस बल का दुरुपयोग कर रही है।

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने इंस्टाग्राम पर लिखा, ”बिहार के मुख्यमंत्री से बिहार पूछता है कि क्या शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर चल रहे छात्रों और युवाओं के आंदोलन और प्रदर्शन का समर्थन करना अपराध है?”

तेज प्रताप की गिरफ्तारी लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन- रोहिणी आचार्य

उन्होंने आगे लिखा, “सम्राट सरकार की पुलिस द्वारा बेबुनियाद और झूठे आरोपों पर तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी लोकतांत्रिक अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है। छात्रों, युवाओं और जनता की समस्याओं के लिए आवाज उठाना प्रत्येक भारतीय नागरिक का मौलिक अधिकार और जिम्मेदारी है। यह गिरफ्तारी अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के निर्वहन के प्रतिशोध में की गई है।”

सरकार के खिलाफ असंतोष को दबाने का प्रयास- रोहिणी आचार्य

रोहिणी आचार्य ने सरकार पर हमला बोलते हुए यह भी कहा, ‘विरोध करने पर गिरफ्तार किया जाना स्पष्ट रूप से सरकार के खिलाफ असहमति को दबाने के लिए दमनकारी तानाशाही कार्रवाई का हिस्सा है।’ उन्होंने पूछा, “यह कैसा न्याय है?” ये कैसा चलन है? ये कैसी परंपरा है? जिसमें सात हत्याओं का एक आरोपी मुख्यमंत्री बन जाता है और देश के युवाओं के लिए आवाज उठाने और संघर्ष करने वाले निर्दोष व्यक्ति को झूठे आरोपों में फंसाकर जेल भेज दिया जाता है?

आपको बता दें कि बिहार के पूर्व मंत्री और जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) प्रमुख तेज प्रताप यादव को रविवार (26 जुलाई) को पटना की एक अदालत ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था. तेज प्रताप को NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन के मामले में शनिवार (25 जुलाई) रात गिरफ्तार किया गया था.

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