बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में भरत तिवारी के एनकाउंटर का मामला गरमाया हुआ है. देशभर में इसकी चर्चा हो रही है. विपक्षी दलों के नेता इसे फर्जी एनकाउंटर बताकर बीजेपी सरकार पर सवाल उठा रहे हैं. इस पर सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) की प्रतिक्रिया सामने आई है. इस मामले पर एआईएमआईएम प्रवक्ता शादाब चौहान ने कहा है कि जहां-जहां बीजेपी की सरकार है, वहां कानून-व्यवस्था चरमरा गई है. उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में एनकाउंटर न्याय का प्रतीक नहीं हो सकता.
भाजपा सरकारें नफरत फैलाकर मुद्दों से भटका रही हैं – शादाब चौहान
एआईएमआईएम के प्रवक्ता शादाब चौहान ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ”जिन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी सत्ता में है वहां कानून व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है.” अपराधियों के मन से कानून का डर खत्म हो गया है, जो अच्छा संकेत नहीं है. ये सरकारें सिर्फ नफरत फैलाकर मुद्दों को भटकाने का काम करती हैं।’ सरकार बुनियादी विषयों कानून व्यवस्था, सम्मान और सुरक्षा में पूरी तरह फेल है.
समाज से कानून का डर खत्म हो रहा है- शादाब चौहान
उन्होंने आगे कहा, ‘एनकाउंटर हो या हत्या की घटना, दोनों पर सवालिया निशान उठ रहे हैं. एनकाउंटर किसी भी हालत में न्याय का प्रतीक नहीं हो सकता, लेकिन यह भी सच है कि अगर कोई पुलिस के खिलाफ हथियार उठा रहा है तो इसका मतलब है कि समाज से कानून का डर खत्म हो रहा है. क्या संरक्षित गुंडे इस तरह का माहौल बना रहे हैं, यह भी जांच का विषय है।
भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र में भरत तिवारी का एनकाउंटर.
आपको बता दें कि भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र में भरत तिवारी नाम के युवक का पुलिस पर पिस्टल तानने का वीडियो वायरल हुआ था. पुलिस का कहना है कि बुधवार (17 जून) को भारत भूषण तिवारी ने कई राउंड फायरिंग की थी, जिसके जवाब में पुलिस ने भी फायरिंग की. पुलिस के मुताबिक आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई. इस दौरान भरत तिवारी को गोली लग गयी और वह गंभीर रूप से घायल हो गये.
सम्राट ने न्यायिक जाँच के आदेश दिये
पुलिस ने घायल युवक को इलाज के लिए पहले आरा सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां से उसे बेहतर इलाज के लिए पटना पीएमसीएच रेफर कर दिया गया. इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. गुरुवार (18 जून) को ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और लोग सड़कों पर उतर आए और विरोध प्रदर्शन किया. परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों का कहना है कि भरत तिवारी का पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था और उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था, फिर भी पुलिस ने उन्हें गोली मार दी. हालांकि, बिहार सरकार ने इस मामले की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं.
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