भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार पुलिस की कार्यशैली पर उठ रहे सवालों के बीच पूर्व डीजीपी अभयानंद ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने एसडीएम की मौजूदगी पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि यह मेरी समझ से परे है कि एसडीएम वहां क्या कर रहे थे?
बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद ने कहा, “सबसे महत्वपूर्ण बात जो मेरे मन में आती है वह यह है कि पुलिस की कार्रवाई दो तरह की होती है. एक वह जिसमें भीड़ होती है, जमावड़ा होता है, कानून व्यवस्था की स्थिति होती है, वहां मजिस्ट्रेट और पुलिस दोनों तैनात होते हैं. इस मामले में मैं देख रहा हूं कि एसडीएम का भी नाम आ रहा है कि वह भी वहां थे. मुझे समझ नहीं आ रहा कि एसडीएम वहां क्या कर रहे थे? क्योंकि इस जमावड़े में कोई दिक्कत नहीं थी.”
पटना, बिहार: भरत तिवारी एनकाउंटर मामले पर बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद कहते हैं, “सबसे महत्वपूर्ण बात जो मेरे मन में आती है वह यह है कि पुलिस की कार्रवाई दो तरह की होती है. एक तो जब भीड़ हो, जमावड़ा हो या कानून-व्यवस्था की स्थिति हो. ऐसी स्थिति में दोनों… pic.twitter.com/oIJnj18pgD
– आईएएनएस (@ians_india) 28 जून, 2026
ऐसी कार्रवाई से एसडीएम का कोई लेना-देना नहीं-अभयानंद
उन्होंने आगे कहा, “जब पुलिस किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने गई थी, तो यह पूरी तरह से अपराध से जुड़ा मामला था। एसडीएम या मजिस्ट्रेट वहां क्या कर रहे थे? एसडीएम का ऐसी कार्रवाई से कोई संबंध नहीं है। अगर डीएम के साथ ऐसा होता है तो यह उनके कार्यालय तक ही सीमित है। हमने अपने अनुभव में नहीं देखा है कि डीएम कभी अपराध के मामले में छापेमारी में पुलिस के साथ गए हों। कभी-कभी कानून व्यवस्था की स्थिति की स्थिति में डीएम को वहां रहना पड़ता है। यह एक ऐसा मुद्दा है जो मेरे दिमाग को परेशान कर रहा है।”
बिहार: एनकाउंटर मामले को हाईकोर्ट ले जाएगा भरत तिवारी का परिवार, SP-SDM पर कार्रवाई की मांग
भोजपुर पुलिस ने मृतक के भाई के आरोपों को खारिज किया है
उधर, भोजपुर पुलिस ने भरत तिवारी मामले में मृतक के भाई चंदन तिवारी को धमकी देने के एसपी पर लगाये गये आरोप को पूरी तरह बेबुनियाद और तथ्यहीन बताया है. पुलिस ने सोशल मीडिया और अन्य संचार माध्यमों पर फैली खबरों का खंडन किया और कहा कि मामले को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही है.
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच जारी है
आरोप है कि 17 जून 2026 की सुबह पुलिस ने भरत तिवारी के घर को घेर लिया था और कुछ आश्वासन मिलने पर जब भरत घर से बाहर निकलकर पुलिस से बात करने लगे तो उन्होंने अपनी पिस्तौल फेंक दी. इसके बावजूद पुलिस ने उन पर कई गोलियां चलाईं, जिसके बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई. आपको बता दें कि बिलौटी गांव में कथित पुलिस मुठभेड़ में मारे गए भरत तिवारी के मामले की न्यायिक जांच की जा रही है.
भरत तिवारी के भाई को धमकी देने के आरोप पर पुलिस का बयान, ‘मृतक के परिजनों ने खुद…’






Leave a Reply