भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में न्याय की मांग तेज, महापंचायत संयोजक बोले- ’30 जून तक सरकार…’

भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौती गांव में हुए चर्चित भारत भूषण तिवारी कथित मुठभेड़ मामले में न्याय की मांग बढ़ती जा रही है. गांव में आयोजित महापंचायत के संयोजक पंकज त्रिपाठी ने सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि भरत तिवारी के श्राद्ध यानी 30 जून तक सरकार की कार्रवाई का इंतजार किया जाएगा. अगर तब तक एफआईआर में नामित पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो महापंचायत आगे की रणनीति तय करेगी।

संयोजक पंकज त्रिपाठी ने कहा, ”24 जून को हुई महापंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि भरत तिवारी के श्राद्ध तक सरकार को कार्रवाई का मौका दिया जाएगा.” सामान्य मामलों में पुलिस हत्या की प्राथमिकी दर्ज होने के 24 घंटे के अंदर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज देती है, लेकिन इस मामले में अब तक किसी भी नामजद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है. इससे लोगों का पुलिस पर भरोसा कमजोर हो रहा है और प्रशासन का रवैया ढीला नजर आ रहा है.

‘पुलिस लगातार पूरे मामले को उलझाने की कोशिश कर रही है’

उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस लगातार पूरे मामले को उलझाने की कोशिश कर रही है. उनका कहना है कि सात दिन बाद पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन उसके बाद भी जांच की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद मजबूत होगी.

‘अमर शहीद भरत तिवारी न्याय संघर्ष समिति’ का गठन

महापंचायत में आगे के आंदोलन की रूपरेखा भी तय की गई है. पंकज त्रिपाठी ने बताया कि ‘अमर शहीद भरत तिवारी न्याय संघर्ष समिति’ का गठन किया गया है. सुप्रीम कोर्ट के वकील अनिल मिश्रा को इसका अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर वकील नागेश्वर दुबे की जिम्मेदारी तय की गई है. कमेटी का संयोजक खुद पंकज त्रिपाठी और सह संयोजक भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी को बनाया गया है. इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों के सामाजिक कार्यकर्ताओं, अधिवक्ताओं और जन प्रतिनिधियों को अलग-अलग समितियों की जिम्मेदारी सौंपी गयी है.

एसडीएम की भूमिका पर भी सवाल उठे

महापंचायत संयोजक ने एसडीएम की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि परिवार लगातार एसडीएम को इस पूरी घटना का कथित साजिशकर्ता बता रहा है. उनका दावा है कि पूरा मामला जवनिया बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास और फंड से जुड़े विवाद से शुरू हुआ. यदि संबंधित अधिकारियों के मोबाइल फोन और कॉल डिटेल की निष्पक्षता से जांच की जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी आशंका जताई कि जब्त किए गए मोबाइल के डेटा के साथ छेड़छाड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है.

पंकज त्रिपाठी ने आगे कहा, ”कमेटी अब 30 जून तक सरकार की कार्रवाई पर नजर रखेगी.” यदि इस अवधि में एफआइआर में नामित आरोपियों की गिरफ्तारी हो जाती है, तो उसी आधार पर आगे की रणनीति तय की जायेगी. लेकिन कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जायेगा.

‘क्या ब्राह्मण समुदाय में जन्म लेना अपराध है?’

इस दौरान उन्होंने एक इमोशनल सवाल भी उठाया. उन्होंने कहा, “क्या किसी जाति में जन्म लेना अपराध है? क्या ब्राह्मण समुदाय में जन्म लेना अपराध है?” उन्होंने आरोप लगाया कि उसी गांव के बिहार पुलिस के सिपाही आशीष तिवारी को एक वायरल वीडियो के आधार पर बर्खास्त कर दिया गया, जिससे समाज में यह संदेश जा रहा है कि प्रशासन दमनकारी रवैया अपना रहा है.

उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार निष्पक्ष कार्रवाई नहीं करेगी और दोषियों को बचाने की कोशिश जारी रहेगी तो लोगों का सिस्टम से भरोसा उठ जाएगा. उनके मुताबिक, पीड़ित परिवार और महापंचायत की सभी समितियां 30 जून तक इंतजार करेंगी, लेकिन उसके बाद न्याय की मांग को लेकर आगे का आंदोलन शुरू करने का फैसला लिया जाएगा.

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