भरत तिवारी एनकाउंटर: सीएम सम्राट की न्यायिक जांच पर उठे सवाल, अब 17 को जंतर-मंतर पर होगा धरना

भारत भूषण तिवारी एनकाउंटर (भारत भूषण तिवारी एनकाउंटर) मामले में न्याय की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को अब राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की तैयारी शुरू हो गई है. आंदोलन से जुड़े नेताओं और अधिवक्ताओं ने घोषणा की है कि भरत तिवारी की शहादत के एक महीने पूरे होने पर 17 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया जाएगा.

इस दौरान देशभर में चलाए जा रहे हस्ताक्षर अभियान की प्रतियां राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को सौंपी जाएंगी और मामले में न्याय की मांग की जाएगी. यह जानकारी आंदोलन से जुड़े पदाधिकारियों ने मंगलवार (जून 30, 2026) को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी.

‘जब तक कार्रवाई नहीं होगी, आंदोलन जारी रहेगा’

आंदोलन से जुड़े अधिवक्ता अनिल मिश्रा ने कहा कि भरत तिवारी मामले में अब तक न्यायालय से न तो अपेक्षित राहत मिली है और न ही सरकार की ओर से कोई ऐसी कार्रवाई की गयी है, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगे. उन्होंने कहा कि जब तक दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी तब तक आंदोलन जारी रहेगा.

यह भी बताया गया कि पिछले कई दिनों से बिहार समेत देश के कई राज्यों में हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है और इस अभियान के जरिए आम लोगों का समर्थन जुटाया जा रहा है. अभियान के समापन के बाद सभी हस्ताक्षरों की प्रतियां राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को सौंपी जाएंगी, ताकि आंदोलन की मांग और लोगों की भावनाओं को केंद्र सरकार तक पहुंचाया जा सके.

न्यायिक जांच पर उठाए सवाल

वहीं, इस घटना के बाद सीएम सम्राट चौधरी ने न्यायिक जांच की घोषणा की थी. सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में जांच भी शुरू हो गयी है. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान न्यायिक जांच पर भी सवाल उठाए गए.

वकील ने कहा, “सिर्फ जांच का आदेश देना ही काफी नहीं है. उनके मुताबिक अगर मामला हत्या का है तो संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए.” उनका आरोप था कि जांच के नाम पर मामले को लंबा खींचा जा रहा है.

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आंदोलन के संयोजक पंकज त्रिपाठी ने कहा, “पहले सरकार को कार्रवाई के लिए समय दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला, इसलिए आंदोलन का अगला चरण शुरू किया जा रहा है. 17 जुलाई के कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए हर गांव, शहर और अलग-अलग राज्यों में लोगों से हस्ताक्षर अभियान में शामिल होने की अपील की जा रही है. आंदोलन पूरी तरह से संविधान और कानून के दायरे में रहेगा.”

उन्होंने कहा कि आंदोलन को व्यवस्थित ढंग से चलाने के लिए ”वीर शहीद भरत तिवारी न्याय संघर्ष मोर्चा” का गठन किया गया है. मोर्चा के अंतर्गत कुल 18 समितियां बनाई गई हैं, जिसमें न्याय से संबंधित समिति फिलहाल सक्रिय रहेगी. इस कमेटी में 21 अधिवक्ताओं को शामिल किया गया है. न्याय मिलने के बाद अन्य समितियां भरत तिवारी के सामाजिक कार्यों और उनके अधूरे सपनों को आगे बढ़ाने का काम करेंगी।

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