भरत तिवारी के एनकाउंटर मामले में लगातार यह सवाल उठ रहा है कि जांच नहीं हो रही है. जिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है. आम लोग कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, इस बीच विपक्षी नेताओं की ओर से भी बयान आ रहे हैं. ऐसे में बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी ने बड़ा बयान दिया है.
संजय सरावगी ने मंगलवार (जून 30, 2026) को मीडिया से कहा, “बिहार के माननीय मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने तीन दिनों में न्यायिक जांच की घोषणा की है… मुझे लगता है कि बिहार में किसी भी मामले में यह पहला ऐसा मामला है…”
संजय सरावगी ने कहा कि कैबिनेट की बैठक में न्यायिक आयोग का गठन किया गया और अगले ही दिन 24 घंटे के अंदर हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज तुरंत मौके पर गये. भरत तिवारी के परिवार से मुलाकात की. मुख्यमंत्री ने जो कदम उठाया है, उससे ज्यादा त्वरित कार्रवाई नहीं हो सकती.
भाई चंदन पर लीपापोती का आरोप
वहीं, भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी का कहना है कि अब तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है. चंदन ने उन पर मामले को रफा-दफा करने का आरोप लगाया. कहा कि इस मामले में कोई जांच नहीं की जा रही है. अब तक अगर आम जनता वहां होती तो उन्हें पकड़ कर अंदर डाल दिया जाता, पुलिस को अंदर नहीं डाला गया, यह कहां का कानून है?
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चंदन ने कहा, “एफआईआर दर्ज हुए एक सप्ताह हो गया, लेकिन कुछ नहीं हो रहा है. कोर्ट पर भरोसा है… न्याय मिलेगा. आम जनता की मांग थी कि भरत तिवारी की मूर्ति बनेगी. इस पर रोक क्यों लगायी गयी? हम जानना चाहते हैं…”
मां ने की फांसी की मांग
वहीं, भरत तिवारी की मां ने कहा, “यह एनकाउंटर नहीं बल्कि हत्या है. प्रशासन ने जानबूझ कर ऐसा किया है. समाज सेवा करने के कारण हत्या हुई है. एसडीएम ने 1400 करोड़ रुपये का घोटाला किया था, इसलिए हत्या की गई. जिन लोगों का भी इसमें हाथ है उन्हें फांसी दी जानी चाहिए.”
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