भरत तिवारी एनकाउंटर केस (भरत तिवारी एनकाउंटर केस) सम्राट चौधरी एक बार फिर आये (सम्राट चौधरी) विपक्ष के निशाने पर सरकार है. इसका कारण यह है कि जिस एसडीपीओ राजेश शर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी थी, उन्हें नयी पोस्टिंग मिल गयी है. अब राजेश शर्मा को मद्यनिषेध एवं नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो इकाई में डीएसपी बनाया गया है. इस पर राजद प्रमुख लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य (रोहिणी आचार्य) सरकार को घेरा है.
गुरुवार (जुलाई 02, 2026) को रोहिणी आचार्य ने उनसे पोस्ट किया
रोहिणी ने कहा, “सम्राट सरकार के इस चौंकाने वाले फैसले से भरत तिवारी के परिजनों और ग्रामीणों का यह आरोप साबित होता दिख रहा है कि फर्जी मुठभेड़ को शीर्ष सरकार, शीर्ष पुलिस अधिकारियों और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की मंजूरी थी.”
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रोहिणी आचार्य ने पोस्ट के जरिए सवाल उठाए हैं. उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री, बिहार सरकार और बिहार के डीजीपी के साथ-साथ बिहार की जनता से भी सवाल किया है.
रोहिणी आचार्य के प्रश्न नीचे पढ़ें
1) मृतक के परिजनों द्वारा दर्ज करायी गयी प्राथमिकी में करीब आधा दर्जन पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाये जाने के बावजूद अब तक उनमें से किसी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?
2) अभी तक नामित आरोपी से पूछताछ क्यों नहीं की गयी?
3) मामले की जांच की गति इतनी धीमी क्यों है और जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता क्यों नहीं बरती जा रही है?
4) क्या आरोपी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी न होने और धीमी व सुस्त जांच का मकसद फर्जी मुठभेड़ का आदेश देने वाले ‘किसी बड़े नाम’ को बचाना है?
5) मेरे एवं मृतक के परिजनों द्वारा पूर्व में उठाया गया महत्वपूर्ण प्रश्न भी वही है कि मृतक का मोबाइल फोन कहां है? करीब एक पखवाड़ा बीत जाने के बाद भी पुलिस द्वारा परिजनों को मोबाइल फोन क्यों नहीं सौंपा गया?
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