बिहार में कोसी नदी एक बार फिर कहर बरपा रही है. सुपौल सदर प्रखंड के तेलवा पंचायत के दियारा इलाके में लगातार हो रहे कटाव के कारण दर्जनों परिवारों के घर नष्ट हो गये हैं. पिछले दो सप्ताह में वार्ड नंबर 5 और वार्ड नंबर 7 के नयानगर टोले के 35 से अधिक घर कोसी नदी में समा गये हैं. हालात ऐसे हैं कि कई परिवार अब खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं तो कुछ लोगों ने रिश्तेदारों के यहां शरण ले रखी है.
कटाव का सबसे ज्यादा असर वार्ड नंबर 5 के नयानगर टोले में देखा गया है. यहां 25 से ज्यादा घर नदी की तेज धारा में बह गये हैं. वहीं, वार्ड संख्या 7 में भी करीब 10 घर कटाव का शिकार हो गये हैं. जिन घरों में कभी परिवारों की रौनक हुआ करती थी, वहां अब सिर्फ कोसी की उफनती धारा ही नजर आती है। वर्षों की मेहनत से बनाए गए आशियानों को अपनी आंखों के सामने टूटते और बहते देख लोग बेबस नजर आ रहे हैं।
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जानवरों का भोजन, शिक्षा और सुरक्षा बड़ी चिंता का विषय बन गए हैं
कटाव प्रभावित परिवारों का कहना है कि पिछले दो सप्ताह से हर दिन दहशत में बीत रहा है. घर उजड़ने के बाद कई परिवार खेतों के किनारे अस्थायी झोपड़ियों में रह रहे हैं तो कुछ रिश्तेदारों के यहां रहने को मजबूर हैं. उनके सामने भोजन की व्यवस्था, बच्चों की पढ़ाई, जानवरों की सुरक्षा और रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर गंभीर संकट है।
पीड़ित मणिभूषण यादव, सुमित्रा देवी, सीताराम यादव व बुच्ची यादव समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि लगातार कटाव के बावजूद अब तक उन्हें राहत या पुनर्वास के लिए कोई ठोस मदद नहीं मिली है. उनका कहना है कि अब उनके पास सिर छुपाने के लिए भी जगह नहीं बची है और वे अपना बचा हुआ सामान किसी तरह सुरक्षित स्थानों पर ले जा रहे हैं.
प्रशासन ने किया निरीक्षण, सूची तैयार करने की कही बात
मंगलवार को टेलवा पंचायत की मुखिया सुमित्रा देवी के पुत्र व सामाजिक कार्यकर्ता विद्या भूषण यादव के निर्देश पर सदर अंचल कार्यालय के अंचल अमीन रवि कुमार ने कटाव प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया. उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और स्थिति का जायजा लिया.
अंचल अमीन रवि कुमार ने कहा, “कटाव प्रभावित परिवारों की सूची तैयार की जा रही है। सूची तैयार होने के बाद सरकारी प्रावधानों के तहत राहत व अन्य सुविधाएं देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।”
सामाजिक कार्यकर्ता विद्या भूषण यादव ने कहा, “कटाव की सूचना तुरंत प्रशासन को दी गई थी, लेकिन शुरुआती दौर में राहत सामग्री, तिरपाल, खाद्यान्न और आवश्यक सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई. उनका कहना है कि केवल सर्वेक्षण से पीड़ितों की समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि तत्काल राहत और पुनर्वास की व्यवस्था करनी होगी.”
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ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित परिवारों को जल्द राहत सामग्री, वैकल्पिक आवास, आर्थिक सहायता और स्थायी पुनर्वास मुहैया कराया जाये. उनका कहना है कि अगर कटाव की यही रफ्तार जारी रही तो आने वाले दिनों में कई और घर कोसी नदी में समा सकते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाया गया तो यह संकट और भी बड़ा रूप ले सकता है.






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