पिछले हफ्ते अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते के बाद अब दोनों देशों के बीच बातचीत का पहला बड़ा दौर शुरू होने जा रहा है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस स्विट्जरलैंड पहुंच रहे हैं, जहां रविवार को होने वाली बातचीत में परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों के कारण फंसा ईरानी पैसा और क्षेत्रीय तनाव जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका चाहता है कि बातचीत की शुरुआत ईरान के परमाणु स्थलों के निरीक्षण से हो, जबकि बदले में वह ईरान को अपने रुके हुए कुछ फंड तक पहुंच देने के लिए तैयार है।
अमेरिका परमाणु स्थलों की जांच करना चाहता है
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि पहले दौर की बातचीत का नतीजा यह हो कि ईरान संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के निरीक्षकों को अपने परमाणु प्रतिष्ठानों का दौरा करने की इजाजत दे. ये वही साइटें हैं जिन पर पहले अमेरिका और इजराइल हमला कर चुके हैं। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि निरीक्षण से यह स्पष्ट हो जाएगा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम किस स्थिति में है और भविष्य में बातचीत के लिए विश्वास का माहौल बनेगा.
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बदले में 6 अरब डॉलर जारी करने को तैयार वॉशिंगटन
इस कदम के बदले में अमेरिका अपने जमे हुए फंड का कुछ हिस्सा ईरान को देने पर विचार कर रहा है. इसकी शुरुआत कतर में रखे करीब 6 अरब डॉलर के खाते से हो सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस रकम का इस्तेमाल इंसानों की जरूरतों से जुड़ी चीजें, जैसे खाने-पीने का सामान और अन्य जरूरी सामान खरीदने के लिए किया जाएगा.
60 दिनों तक बातचीत की संभावना है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच अंतरिम शांति समझौते के तहत दोनों देशों को 60 दिन का समय मिला है, जिसमें स्थायी समाधान की दिशा में बातचीत की जाएगी. हालाँकि, यह तो बस शुरुआत है और दशकों पुराने तनाव को ख़त्म करने का रास्ता अभी भी लंबा माना जा रहा है।
जेडी वेंस ने कहा- बातचीत के लिए रूपरेखा बनाना पहली प्राथमिकता है
स्विट्जरलैंड रवाना होने से पहले जेडी वेंस ने कहा कि वह वहां सिर्फ एक या दो दिन ही रुकेंगे. उन्होंने उम्मीद जताई कि परमाणु मुद्दे और इजराइल-लेबनान संघर्ष से जुड़े मामलों पर कुछ प्रगति हो सकती है. वेंस के मुताबिक, पहले दौर का मुख्य उद्देश्य आगे की बातचीत के लिए एक ठोस रूपरेखा तैयार करना है।
पाकिस्तान भी मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है
इस बातचीत में पाकिस्तान भी अहम भूमिका निभा रहा है. प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर भी स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक पहुंच रहे हैं. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह अमेरिका और ईरान के बीच समझौतों को लागू करने में सहयोग करना जारी रखेगा.
ईरानी प्रतिनिधिमंडल में बड़े चेहरे शामिल
ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबफ, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दोलनासर हेममती वार्ता में हिस्सा ले रहे हैं। इन नेताओं की मौजूदगी को इस बात का संकेत माना जा रहा है कि तेहरान भी बातचीत को गंभीरता से ले रहा है. अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की नीतियां इस शांति प्रक्रिया में बाधा बन सकती हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ सख्त रुख बनाए रखने के लिए नेतन्याहू पर घरेलू राजनीतिक दबाव है। ऐसे में अगर इजराइल सैन्य कार्रवाई जारी रखता है तो अमेरिका-ईरान वार्ता प्रभावित हो सकती है.
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होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव जारी है
हालाँकि, अंतरिम समझौते के बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोल दिया गया और अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नौसैनिक नाकेबंदी भी हटा ली, लेकिन तनाव पूरी तरह ख़त्म नहीं हुआ है। बाद में ईरान ने चेतावनी दी कि अगर लेबनान में इजरायली हमले जारी रहे और अमेरिका अपने वादों पर खरा नहीं उतरा तो वह फिर से सख्त कदम उठा सकता है.
ट्रंप का बड़ा बयान
इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि 60 दिन की वार्ता अवधि के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर कोई टोल नहीं लगाया जाएगा. हालांकि, उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम सहमति नहीं बन पाई तो भविष्य में टैरिफ लगाने जैसे कदमों पर विचार किया जा सकता है.
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पहले दौर की सबसे बड़ी डील क्या है?
पहले दौर की बातचीत के लिए फिलहाल सबसे अहम फॉर्मूला यही माना जा रहा है- ईरान को अपने परमाणु स्थलों के निरीक्षण की इजाजत देनी चाहिए और बदले में अमेरिका को 6 अरब डॉलर के रुके हुए फंड तक उसकी पहुंच बहाल करनी चाहिए. अगर इस मुद्दे पर सहमति बनती है तो यह दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में पहला बड़ा कदम साबित हो सकता है.





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