ब्रिटिश उच्चायुक्त ने इस सप्ताह पाकिस्तान की सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए एक फंड की घोषणा की। ब्रिटिश सरकार ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है जब ऑस्ट्रेलियाई राजदूत ने ऐतिहासिक स्थल तक्षशिला का दौरा किया था. पाकिस्तान की विरासत पर भी ध्यान दिया. अब पाकिस्तान सिंधु घाटी सभ्यता आइये जानते हैं कि वह इस बारे में क्या कर रहे हैं। क्या ये भारत के खिलाफ पाकिस्तान की नई चाल है?
क्या सिंधु घाटी सभ्यता के नाम पर पड़ोसी पाकिस्तान की नज़र सिंधु नदी के पानी पर है?
दरअसल, पाकिस्तान का मकसद यह हो सकता है कि वह सिंधु घाटी सभ्यता के जरिए दुनिया का ध्यान सिंध नदी की ओर खींचना चाहता है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था. फिर पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव है.
हाल ही में पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मौकों पर सिंधु जल संधि को निलंबित करने के फैसले का मुखर होकर विरोध कर रहा है. अब शायद पाकिस्तान इसी पुरानी सभ्यता के सहारे अपनी ऐतिहासिक जड़ों को मजबूती से पेश करना चाहता है और दुनिया के सामने एक नया दावा करना चाहता है.
19 जून को ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त टिमोथी केन ने तक्षशिला का दौरा किया था. तब उन्होंने इस क्षेत्र को शिक्षा का अच्छा केंद्र बताया था. इसके बाद 24 जून को ब्रिटिश उच्चायुक्त जेन मैरियट ने एक्स पर पोस्ट किया. इसमें पाकिस्तान की विरासत की सुरक्षा के लिए फंडिंग की घोषणा की गई.
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आपको बता दें, पाकिस्तान पहले भारत का ही हिस्सा था, लेकिन आजादी के वक्त यह देश दो हिस्सों में बंट गया। तभी से पाकिस्तान अस्तित्व में आया. अब पाकिस्तान भारतीय संस्कृति में अपनी जड़ें तलाश रहा है. इसके पीछे का मकसद सिंधु जल संधि के दावे या अधिकार को मजबूत करना है..
पाकिस्तान अपना इतिहास कितना पुराना बता रहा है?
पाकिस्तान 712 ई. में मुहम्मद बिन कासिम द्वारा सिंध पर विजय के बाद से अपना इतिहास बताता रहा है, इसलिए अब सिंध घाटी सभ्यता का उल्लेख करना उसके इतिहास के प्रति नव जागृत प्रेम को उजागर कर रहा है। पहलगाम हमले के बाद पीएम नरेंद्र मोदी पहले ही कह चुके हैं कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते. हाल ही में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की धमकी दी है.
पाकिस्तान को फंड देने के फैसले पर ब्रिटेन में आलोचना
पाकिस्तान की ऐसी मंशा अब सवालों के घेरे में है. जेन मैरियट के वीडियो के बाद लोगों ने सवाल उठाया है कि ब्रिटेन पाकिस्तान में ऐसे प्रोजेक्ट्स को फंडिंग क्यों कर रहा है? वहीं, ब्रिटिश नागरिकों ने भी इस तरह के फंड जारी करने के लिए अपनी सरकार की आलोचना की है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी यानी पीपीपी प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी ने सभ्यता का उदाहरण देते हुए सिंधु जल संधि पर भारत के फैसले का विरोध किया था.
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