पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में उग्रवाद के 24वें दिन पीओके के लोगों ने दुनिया के सामने पाकिस्तान की भारत के खिलाफ जारी आतंक नीति की गवाही दे दी है. रावलकोट के ईदगाह मैदान में आज विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले अवामी एक्शन कमेटी के नेता सरदार अमन खान ने कहा कि पाकिस्तानी सेना ने पीओके के लोगों के हाथों में बंदूकें दे दी हैं. खान ने पाकिस्तान की सरकारी मशीनरी द्वारा आतंकवादी संगठनों को संरक्षण देने की भी गवाही दी.
दरअसल, पीओके की सरकार ने 9 जून से चल रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल अवामी एक्शन कमेटी और उससे जुड़े 150 लोगों को आतंकवादी घोषित कर दिया है, जिस पर अमन खान ने पाकिस्तान सरकार की पोल खोलते हुए कहा कि वे हमें आतंकवादी कहते हैं। मैं यहां मौजूद मीडिया की मौजूदगी में मानवाधिकार संगठनों को गवाह मानकर कहता हूं कि कश्मीरियों के हाथों में बंदूकें पाकिस्तानी सेना ने ही दी थीं और वे हमें आतंकवादी कहते हैं.
पाकिस्तान सरकार और सरकारी तंत्र द्वारा आतंकवादी संगठनों को दिए जा रहे प्रायोजन और संरक्षण की गवाही देते हुए पीओके के सुधनोती निवासी सरदार अमन खान ने पिछले साल 5 फरवरी को इसी रावलकोट शहर में जैश-ए-मोहम्मद की रैली का जिक्र किया, जब आतंकवादी खुलेआम सड़कों पर तलवारें और एके-47 लेकर रैली कर रहे थे और भारत को धमकी दे रहे थे.
प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी सरकार को चुनौती दी
अमन खान ने रावलकोट के डिप्टी कमिश्नर का नाम लेते हुए कहा कि डिप्टी कमिश्नर रावलकोट, आप यहां बंदूकों और तलवारों के साथ रैलियां निकालते थे, क्या आपको याद है और आप हमें आतंकवादी कहेंगे, ये सभी लोग (प्रदर्शनकारी) इस धरती के वारिस हैं। ईदगाह मैदान पर चल रहे विद्रोह में प्रदर्शनकारियों ने एक बार फिर पाकिस्तानी सरकार को कड़े शब्दों में याद दिलाया कि पीओके उसका हिस्सा नहीं है.
सरदार अमन खान ने कहा कि पाकिस्तान का सपना है कि पीओके उसका संरक्षित क्षेत्र है. वह कश्मीरियों को अपना गुलाम बनाने का सपना देखता है लेकिन न तो पीओके के लोग पाकिस्तान के गुलाम हैं, न उनके पूर्वज पाकिस्तान के गुलाम हैं और न ही आने वाली पीढ़ियां पाकिस्तान की गुलाम होंगी।
शाहबाज सरकार को बड़ी चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि उनके पास प्रदर्शनकारियों से बात करने और उनकी मांगों को स्वीकार करने का एक ही रास्ता है. वरना अगर पीओके के अलग-अलग शहरों से रावलकोट में जमा हुए 80 हजार लोग मुजफ्फराबाद पहुंचेंगे तो बात 38 मांगों की नहीं बल्कि पाकिस्तान से पीओके को खाली कराने की होगी.
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