बिहार के किशनगंज से कांग्रेस सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद आजाद अपने एक ताजा बयान को लेकर विवाद में घिर गए हैं। सेवादल के धरने के दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने उर्दू को देश की भाषा बताया और अंग्रेजी के साथ-साथ संस्कृत को भी विदेशी भाषा बताया. सांसद के इस दावे के बाद सनातनी समाज और स्थानीय संगठनों में तीखी नाराजगी देखी जा रही है.
‘उर्दू है यहां के लोगों की असली भाषा’
दरअसल, पूरा मामला बीते सोमवार (13 जुलाई) का है, जब सांसद डॉ. जावेद किशनगंज के अंबेडकर टाउन हॉल के पास कांग्रेस सेवा दल के धरने में शामिल होने पहुंचे थे. उन्होंने बिहार के नए डिग्री कॉलेजों से उर्दू विषय हटाने के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि बिहार में उर्दू को दूसरी राजभाषा का दर्जा मिला हुआ है. हम इसे ऐसे ख़त्म नहीं होने देंगे. उन्होंने आगे दावा किया कि उर्दू यहां के लोगों की असली भाषा है. यह पूर्णतः भारत की मिट्टी में जन्मी भाषा है।
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संस्कृत को विदेशी कहे जाने पर आलोचक नाराज
विवाद तब बढ़ गया जब उन्होंने उर्दू की वकालत करते हुए संस्कृत और अंग्रेजी को विदेशी भाषाओं की श्रेणी में रख दिया. सांसद ने कहा कि ये दोनों भाषाएं बाहर से आयी हैं. अब उनके इस बयान पर आपत्ति जताते हुए आलोचकों का कहना है कि संस्कृत को विदेशी कहना सीधे तौर पर भारतीय इतिहास, उसकी गौरवशाली परंपरा और सनातन संस्कृति का अपमान है।
आपको बता दें कि ऐतिहासिक और भाषाई तथ्यों के अनुसार, संस्कृत दुनिया की सबसे पुरानी जीवित भाषाओं में से एक है। इसकी जड़ें पूरी तरह से भारतीय उपमहाद्वीप से जुड़ी हुई हैं। संस्कृत हजारों वर्षों से भारत के दर्शन, विज्ञान, खगोल विज्ञान और साहित्य की रीढ़ रही है। कांग्रेस सांसद के इस बयान के बाद सियासी बवाल मच सकता है. इस पर अभी अन्य दलों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
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