बिहार में पंचायत चुनाव से पहले सम्राट सरकार ने राज्य की पंचायत में खर्च को लेकर बड़ी कार्रवाई की है, जिसमें साफ निर्देश दिया गया है कि एक फीसदी से कम खर्च करने वालों पर कार्रवाई होगी. इसमें मुखिया और पंचायत सचिव जिम्मेदार होंगे, क्योंकि पंचायत द्वारा जो भी निकासी की जाती है वह मुखिया और पंचायत सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से डोंगल के आधार पर की जाती है.
पंचायती राज विभाग का निर्देश, 15 लाख से ऊपर के काम पर होगी कार्रवाई
पंचायती राज विभाग ने पंचायत के खर्च को लेकर दिये सख्त निर्देश, 15 लाख से ऊपर बिना टेंडर काम कराने पर होगी कार्रवाई निर्देश में कहा गया है कि नियम तोड़ने वाले अधिकारियों पर गाज गिरना संभव है. साथ ही जर्जर पंचायत भवनों पर भी कार्रवाई की जाएगी। पंचायत में काम करने वाली लापरवाह एजेंसियों पर जहां जुर्माना लगेगा, वहीं अच्छा काम करने वाली पंचायतों को प्राथमिकता भी मिलेगी. इसके अलावा विभाग की ओर से सख्त निर्देश दिया गया है कि घटिया निर्माण करने वाली एजेंसियों को ब्लैकलिस्टेड किया जाएगा.
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32 साल बाद बुधवार को पंचायत परिसीमन बिल को मंजूरी मिल गई
आपको बता दें कि पंचायत चुनाव से पहले सम्राट सरकार पंचायत को लेकर एक्शन मोड में है. चुनाव से पहले पिछले बुधवार (15 जुलाई) को 32 साल बाद पंचायत के परिसीमन विधेयक को मंजूरी दे दी गई और गांव के विस्तार के लिए कर दर और शुल्क 2026 का गठन भी किया गया, जिसमें शहरी क्षेत्रों की तरह ग्रामीण क्षेत्रों में भी घरों और व्यापारियों से कर लिया जाएगा. अब पंचायत में हो रही धांधली पर विभाग और सम्राट सरकार की ओर से बड़ी कार्रवाई की गयी है.
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