पाकिस्तान एक बार फिर अपनी न्यायिक व्यवस्था और मानवाधिकार रिकॉर्ड को लेकर अंतरराष्ट्रीय आलोचना के केंद्र में आ गया है। पाकिस्तान की आतंकवाद निरोधी अदालत द्वारा बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. महरंग बलूच और उनके सहयोगी सिबगतुल्लाह शाह को दी गई उम्रकैद की सजा पर दुनिया भर से सवाल उठ रहे हैं।
नीदरलैंड स्थित इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन (आईएचआरएफ) ने इस फैसले की कड़ी निंदा की है और इसे ‘न्याय का घोर उपहास’ और ‘कानून के शासन पर सीधा हमला’ बताया है।
डॉ. महरांग बलोच लंबे समय से बलूचिस्तान में कथित तौर पर जबरन गायब किए जाने, फर्जी मुठभेड़ों और सरकारी दमन के खिलाफ आवाज उठाती रही हैं। IHRF का कहना है कि उनका एकमात्र अपराध यह था कि उन्होंने मानवाधिकारों के उल्लंघन को उजागर करने की कोशिश की थी।
तत्काल रिहाई के लिए
अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन (आईएचआरएफ) ने पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा डॉ. महरंग बलूच और सिबगतुल्ला शाह को शर्मनाक आजीवन कारावास की सजा की निंदा की
हेग, नीदरलैंड – 23 जून, 2026 – अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन (आईएचआरएफ) ने व्यक्त किया… pic.twitter.com/aLowRZ4oJg
– अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन (@IHRF_English) 23 जून, 2026
संगठन के बयान में कहा गया है कि यह मामला गंभीर कानूनी अनियमितताओं से भरा है। आरोप है कि सुनवाई जेल परिसर में एक तरह की ‘गुप्त अदालत’ में हुई, जहां आरोपियों को गवाहों से प्रभावी ढंग से जिरह करने और अपना पक्ष रखने का पूरा मौका नहीं दिया गया. आईएचआरएफ ने कहा कि ऐसी प्रक्रिया को निष्पक्ष न्यायिक सुनवाई नहीं कहा जा सकता.
सबसे बड़ा सवाल पाकिस्तान के न्यायिक ढांचे पर उठ रहा है, जिस पर सालों से राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने का आरोप लगता रहा है. आलोचकों का कहना है कि आतंकवाद विरोधी कानूनों का इस्तेमाल धीरे-धीरे आतंकवाद से लड़ने के बजाय असहमति की आवाजों को दबाने के लिए किया जा रहा है।
IHRF ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह निर्णय ‘न्याय नहीं, बल्कि न्यायिक प्रणाली का राजनीतिक हथियार के रूप में उपयोग’ है। संगठन ने चेतावनी दी कि शांतिपूर्ण सामाजिक कार्यकर्ताओं पर आतंकवाद कानून थोपना पाकिस्तान में नागरिक स्वतंत्रता पर बढ़ते दबाव का संकेत है।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन पहले भी बलूचिस्तान में कथित मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर चिंता जता चुके हैं. बलूच कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र में जबरन गायब होने, हिरासत में लेने और दमन की घटनाओं की कोई स्वतंत्र जांच नहीं की जाती है। पाकिस्तान सरकार इन आरोपों को ख़ारिज करती रही है, लेकिन हर नए मामले के साथ उसकी सफ़ाई पर सवाल और गहरे होते जा रहे हैं.
महरंग बलूच को आजीवन कारावास
10 पन्नों के फैसले में, पाकिस्तान की आतंकवाद-रोधी अदालत (एटीसी) ने एक एफसी जवान की मौत से संबंधित मामले में डॉ महरंग बलूच और सिबगतुल्ला शाह को दोषी ठहराया। अदालत ने अभियोजन पक्ष के इस आरोप को स्वीकार कर लिया कि महरंग बलूच के भाषण के बाद भीड़ ने सुरक्षा बलों पर हमला किया। हालांकि मामले को लेकर विवाद भी गहरा गया है. दोनों आरोपियों ने वीडियो लिंक के जरिए सुनवाई का बहिष्कार किया और सरकारी वकील लेने से इनकार कर दिया. बचाव पक्ष ने मुख्य गवाह मेजर वलीद के अदालत में उपस्थित न होने पर सवाल उठाए, लेकिन अदालत ने इसे मामले के बुनियादी तथ्यों को प्रभावित न करने वाला मुद्दा माना और घटना को विरोध नहीं, बल्कि आतंकवाद की श्रेणी में रखा।
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