लवीना टंडन, जिन्हें हमने कई टीवी शोज़ और वेब शोज़ में देखा है, उनकी ज़िंदगी के ऐसे पहलू जिन्हें शायद ही कोई जानता हो, पॉडकास्ट “द एडी शो” में सामने आए। इस शानदार बातचीत में लवीना ने अपने निजी जीवन, करियर, मानसिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिकता से जुड़े अनुभवों को साझा किया। यह न केवल उनके प्रशंसकों के लिए बल्कि उन लोगों के लिए भी प्रेरक है जो इन विषयों पर संघर्ष कर रहे हैं।
बचपन की यादें और एक साधारण शुरुआत
बातचीत की शुरुआत उनके बचपन और उनकी इंडस्ट्री में एंट्री से हुई। लवीना ने बताया कि वह बचपन से ही मस्तीखोर और परिवार की लाडली थीं। उनके माता-पिता ने हर कदम पर उन्हें प्यार और समर्थन दिया। अभिनय की दुनिया में उनकी यात्रा एक मज़ेदार संयोग की तरह शुरू हुई।
12 साल की उम्र में, उनके बालों के कारण उन्हें “तुम बिन जाऊं कहां” शो में रोल मिला। उन्���ोंने कहा कि एक्टिंग सीखने का उनका पहला स्कूल वही शो था। हालांकि उन्होंने कभी इस करियर को चुना नहीं, बल्कि इस करियर ने उन्हें चुना।
पर्दे पर नेगेटिव रोल और उसकी चुनौती
लवीना ने अपने करियर में नेगेटिव किरदारों को निभाने की बात की। उन्होंने कहा कि उनकी भौतिक बनावट – घुंघराले बाल और स्किन टोन – के कारण उन्हें ज्यादातर नेगेटिव रोल ऑफर हुए। लेकिन नेगेटिव किरदार निभाना उनके लिए हमेशा एक चुनौती और मज़ेदार अनुभव रहा।
उनका सबसे चर्चित किरदार “जोधा अकबर” में रुकैया बेगम का रहा, जिसने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। हालांकि इस शो में उन्हें नफरत भरे कमेंट्स भी मिले, लेकिन उन्होंने इसे सकारात्मक रूप में लिया। उन्होंने कहा, “अगर लोग किरदार से नफरत कर रहे हैं तो इसका मतलब है कि मैं इसे सही ढंग से निभा रही हूं।”
मानसिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिकता
लवीना ने अपने संघर्षों और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि कैसे एक ब्रेकअप ने उन्हें गहरे डिप्रेशन में डाल दिया था। इस वक्त उन्होंने प्रोफेशनल मदद ली और आध्यात्मिकता का सहारा लिया। योग, ध्यान, और सद्गुरु जैसे मार्गदर्शकों की मदद से उन्होंने अपने जीवन को फिर से संतुलित किया।
उनकी आध्यात्मिक यात्रा का एक बड़ा हिस्सा एक शो “मीरा बाई” का किरदार निभाने के दौरान शुरू हुआ। इस किरदार ने उन्हें जीवन और प्रेम को गहराई से समझने का मौका दिया। उन्होंने भगवान कृष्ण के प्रति अपने प्रेम और समर्पण को बढ़ते हुए महसूस किया।
कोविड के दौरान नई चुनौतियां
कोविड के समय जब काम की कमी हुई तो लवीना ने खुद को नए स्किल्स में आज़माया। उन्होंने वेब शो “ये काली काली आंखें” में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम किया। इस अनुभव ने न केवल उनके काम के प्रति नजरिया बदला बल्कि पर्दे के पीछे काम करने वाले लोगों की कठिनाइयों को भी समझने का मौका दिया।
जानवरों के प्रति प्रेम और भविष्य की योजना
लवीना एक बड़ी एनिमल लवर हैं और उन्होंने कई एनिमल शेल्टर्स के लिए काम किया है। उन्होंने अपने भविष्य के सपनों में एक बड़ा एनिमल शेल्टर खोलने की इच्छा जताई, जिसमें विशेष रूप से बूढ़े और दिव्यांग जानवरों की देखभाल होगी।
उनके अनुसार, “प्यार सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं है। जानवरों को भी हमारी जरूरत है, खासतौर पर वो जो खुद को बचा नहीं सकते।”
सोशल मीडिया: वरदान या अभिशाप?
सोशल मीडिया के बारे में अपनी राय रखते हुए लवीना ने इसे पेशेवर रूप से एक वरदान और व्यक्तिगत रूप से एक अभिशाप बताया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ने बहुत से कलाकारों को पहचान दिलाई है लेकिन इसकी लगातार भाग-दौड़ मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालती है।
उन्होंने यह भी बताया कि ट्रोलिंग के अनुभवों ने उन्हें यह सिखाया कि खुद को सच्चा बनाए रखना ही सबसे महत्वपूर्ण है।
प्यार, शादी और अपनापन
शादी और रिश्तों पर बात करते हुए लवीना ने कहा कि वह चाहती हैं कि उन्हें ऐसा साथी मिले जो उनके पागलपन को समझे और स्वीकार करे। उन्होंने अपनापन का समर्थन करते हुए यह भी बताया कि वह खुद गोद ली गई थीं और इस अनुभव ने उन्हें और अधिक संवेदनशील बनाया।
निष्कर्ष
लवीना टंडन का जीवन केवल एक कलाकार बनने तक ही सीमित नहीं है। यह उनकी आध्यात्मिकता, संवेदनशीलता, और हर चुनौती का हिम्मत से सामना करने की कहानी है। उनकी यात्रा हमें यह सिखाती है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि आप खुद पर और अपने सपनों पर विश्वास रखेंगे तो हर मुश्किल को पार कर सकते हैं।
पढ़कर कैसा लगा? क्या आपको भी लवीना की कहानी प्रेरित करती है? अपने विचार नीचे कमेंट में ज़रूर बताएं!















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