भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार के सोशल मीडिया पोस्ट पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. मामला अमेरिका के इंडो-पैसिफिक कमांड के नाम से शुरू हुआ, जिसने अब एक नई भूराजनीतिक बहस छेड़ दी है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर यूएस पैसिफिक कमांड करने का फैसला किया है. यह फैसला 2018 में लिए गए फैसले को पलटता है, जब इसे इंडो-पैसिफिक कमांड का नाम दिया गया था.
हिना रब्बानी खार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस फैसले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी भी देश का महत्व और सम्मान इस बात से तय नहीं होना चाहिए कि अमेरिका अपने किसी सैन्य कमांड को क्या नाम देता है। उनके मुताबिक अगर सिर्फ नाम बदलने से किसी देश का गौरव प्रभावित होता है तो ये चिंता की बात है. हिना रब्बानी खार ने अपने पोस्ट में कहा कि देशों को अपनी पहचान और महत्व अपने फैसलों और नीतियों से तय करना चाहिए, न कि बाहरी ताकतों द्वारा बनाए गए नैरेटिव से. उन्होंने यह भी कहा कि देशों को डर या दुष्प्रचार के जरिए अपनी अहमियत साबित करने की कोशिश से बचना चाहिए.
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हिना रब्बानी खार के बयान पर कंवल सिब्बल ने दी प्रतिक्रिया.
हिना के इस बयान पर कंवल सिब्बल ने कड़ा जवाब दिया. उन्होंने अपने बयान को भूराजनीति की समझ से रहित बताया. सिब्बल ने कहा कि इंडो-पैसिफिक सिर्फ एक नाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा रणनीतिक और सुरक्षा संबंधी संदेश है. कंवल सिब्बल के मुताबिक, इंडो-पैसिफिक अवधारणा का मतलब प्रशांत महासागर और हिंद महासागर की सुरक्षा को एक साथ जोड़ना है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते समुद्री प्रभाव और जापान की सुरक्षा चिंताओं ने इस सोच को मजबूत किया है. जबकि क्वाड समूह ने इसे और अधिक संरचना प्रदान की.
रणनीतिक मुद्दों को हल्के में नहीं लेना चाहिए- कंवल सिब्बल
कंवल सिब्बल ने कहा कि ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में रणनीतिक संदेश देने के लिए यूएस पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड कर दिया था. इसका उद्देश्य यह दिखाना था कि अमेरिका हिंद महासागर और प्रशांत महासागर दोनों को एक साझा सुरक्षा क्षेत्र के रूप में देखता है। अब जब नाम वापस बदलकर यूएस पैसिफिक कमांड कर दिया गया है तो इसे सिर्फ नाम का बदलाव मानना सही नहीं होगा।
सिब्बल ने कहा कि इस फैसले के पीछे की रणनीतिक सोच को समझना जरूरी है क्योंकि इससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और शक्ति संतुलन पर असर पड़ सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि चीन शुरू से ही इंडो-पैसिफिक कॉन्सेप्ट और क्वाड दोनों का विरोध करता रहा है. ऐसे में चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश इस बदलाव के भू-राजनीतिक प्रभाव को गंभीरता से समझने की कोशिश करेंगे। कंवल सिब्बल ने साफ कहा कि ऐसे रणनीतिक मुद्दों को हल्के में नहीं लेना चाहिए. उनके मुताबिक ये सिर्फ नाम बदलने का मामला नहीं है बल्कि ये वैश्विक राजनीति, सुरक्षा और शक्ति संतुलन से जुड़ा अहम मुद्दा है.
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