पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में विद्रोह का आज दसवां दिन है. 60-70 हजार लोग ईदगाह मैदान पर बैठे हैं और सैकड़ों लोग शहर के अंदर सड़कों पर पीओजेके का झंडा और सफेद झंडा लेकर आजादी के नारे लगा रहे हैं और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ को “टेररिस्ट” यानी आतंकवादी बता रहे हैं और रावलकोट में आसिम मुनीर की पाकिस्तानी सेना के लिए “कर्नल-जनरल आतंकवादी” के नारे भी गूंज रहे हैं.
पाक सेना के खिलाफ बढ़ रहा गुस्सा
दरअसल, पिछले 7 जून से अब तक पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की गोलीबारी में 56 नागरिकों की मौत हो चुकी है और फिर पिछले चार दिनों से पाकिस्तानी सरकार ने पीओजेके में खाद्य सामग्री ले जा रहे ट्रकों को सीमा पर खड़ा कर दिया है, जिससे पीओजेके के लोगों में पाकिस्तानी सरकार और सेना के खिलाफ गुस्सा बढ़ता जा रहा है.
इस बीच पिछले हफ्ते पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी में मारे गए युवक फैजान रब्बानी की याद में आज उनके गांव में लोग जुटे, जिसमें लोगों ने पाकिस्तानी सरकार और सेना को आतंकवादी करार दिया और आजादी के नारे लगाए.
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प्रदर्शनकारियों की बात सुनने को तैयार नहीं पाक सरकार!
आम लोगों के अलावा पीओजेके में स्कूली लड़कियों और उनके शिक्षकों ने पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ मार्च निकाला और पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ तालियां बजाईं. पाकिस्तान के कब्जे वाले पूरे जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट बंद होने के कारण 14 जून को पाकिस्तानी रेंजर्स के नरसंहार की तस्वीर आज सामने आई, जिसमें रावलकोट के एक गेस्ट हाउस की खिड़कियों के अंदर और बाहर गोलियों के निशान दिखाई दे रहे हैं।
इस गेस्ट हाउस में अवामी एक्शन कमेटी के नेता ठहरे हुए थे और उन्हें निशाना बनाने के लिए गेस्ट हाउस पर गोलियां चलाई गईं. 9 जून से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन को 10 दिन हो गए हैं और न तो पाकिस्तानी सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगें मानने को तैयार है और न ही प्रदर्शनकारी झुकने को तैयार हैं. ऐसे में देखना होगा कि पीओजेके में बगावत किस तरह आगे बढ़ती है.
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