ईरान के साथ चल रही बातचीत और समझौते को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए बयान से एक बार फिर युद्ध की आशंका गहरा गई है. ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान हमारी शर्तें नहीं मानेगा तो दोबारा बमबारी करेगा. ट्रंप ने कहा, ‘ईरान के साथ समझौता अंतिम नहीं है. यह सिर्फ एक एमओयू है. अगर ईरान ने अमेरिका की शर्तें नहीं मानी तो हम दोबारा बमबारी करेंगे. ट्रंप ने ये बातें मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी के साथ बैठक में कहीं.
ट्रंप ने दी ईरान पर हमले की धमकी
ट्रंप ने ईरान को धमकी देते हुए कहा, ‘अगर उन्होंने ठीक से व्यवहार नहीं किया तो हम सीधे उनके सिर पर बम गिरा देंगे. क्योंकि उसने पिछले 47 साल से गलत काम किया है. पूर्व राष्ट्रपति ओबामा द्वारा हस्ताक्षरित जेसीपीओए (ईरान परमाणु समझौते) में उन्होंने उन्हें (ईरान को) 1.7 बिलियन डॉलर नकद सौंपे थे। उन्हें लाखों डॉलर दिए. उसने पैसे देकर रास्ता निकालने की कोशिश की. मैंने ऐसा नहीं किया।’
डोनाल्ड ट्रंप ने उस खबर को झूठा बताया जिसमें दावा किया गया था कि खाड़ी देशों के पैसे से 300 अरब डॉलर का निर्माण कोष बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका इस काम में एक पैसा भी निवेश नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि अगर दूसरे देश अपने यहां निवेश करना चाहते हैं तो हम उन्हें रोक नहीं सकते, लेकिन खाड़ी देश भी तब तक निवेश नहीं करेंगे जब तक वे ईरान का व्यवहार नहीं देख लेंगे.
ईरान की सैन्य व्यवस्था नष्ट: ट्रंप
ट्रंप का दावा है कि इतिहास में कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान पर उनके जितना सख्त नहीं रहा है. ट्रंप ने कहा, ‘क्लिंटन, बुश, ओबामा और बिडेन जैसे पिछले राष्ट्रपतियों ने इस समस्या को हल करने के लिए कुछ नहीं किया और ईरान पिछले 47 वर्षों से अमेरिका को धोखा देता रहा. हमने ईरान की नौसेना, वायु सेना और संपूर्ण सैन्य प्रणाली को नष्ट कर दिया है, ईरान के पास न तो रडार और न ही मिसाइल रक्षा प्रणाली बची है।
ट्रंप ने कहा, ‘अमेरिकी नौसेना ने हर रात गुप्त रूप से 15 से 25 ईरानी जहाजों को नष्ट कर दिया, जिसके बारे में जनता को पता भी नहीं चला. इस कार्रवाई के कारण कच्चे तेल की कीमतें 300 डॉलर प्रति बैरल तक नहीं पहुंचीं और नियंत्रण में रहीं। हमने अपने पहले कार्यकाल में ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी को मार गिराया था. इसी कड़ी सैन्य घेराबंदी और नाकेबंदी के कारण आज अमेरिका इस स्थिति में पूरी तरह से हावी है।
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