भारतीय सैनिक कभी भी शांतिरक्षा मिशन के लिए यूक्रेन नहीं जाएंगे, क्योंकि भारत कभी भी किसी चीज़ के बदले में कुछ नहीं देता. ये कहना है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का.
दरअसल, राष्ट्रपति ट्रंप ने ये बात तब कही थी जब अमेरिका के राष्ट्रपति भवन यानी व्हाइट हाउस में रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने को लेकर चर्चा चल रही थी. पिछले साल यानी 2025 में ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस यूक्रेन युद्ध रोकने को लेकर चर्चा कर रहे थे, तब ये बातचीत चल रही थी. वेंस ने भारतीय सैनिकों को यूक्रेन में शांति मिशन पर भेजने का सुझाव दिया था, क्योंकि भारत के रूस के साथ अच्छे संबंध हैं, लेकिन ट्रंप ने भारत को लेकर अपने बयान से इन अटकलों पर विराम लगा दिया.
ट्रंप पर छपी किताब में खुलासा
अब यह चर्चा अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार सत्ता में आने के बाद रिलीज हुई एक किताब का हिस्सा बन गई है. किताब का नाम ‘रिजाइम चेंज’ है, जिसे मैगी हैबरमैन और जोनाथन स्वान ने लिखा है। किताब में व्हाइट हाउस में ट्रंप और वेंस के साथ यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की की विवादास्पद मुलाकात के बारे में विस्तार से लिखा गया है। बैठक की पृष्ठभूमि भी दी गई है. किताब में ऐसी ही एक पृष्ठभूमि बैठक में भारतीय सैनिकों को यूक्रेन भेजने के बारे में लिखा गया है.
किताब में ट्रंप ने भारत के बारे में क्या कहा??
किताब में लिखा है कि बैठक में ट्रंप और वेंस अमेरिकी दूत के साथ रूस-यूक्रेन युद्ध से संबंधित चर्चा कर रहे थे. इस दौरान यूक्रेन में सुरक्षा गारंटी के लिए दूसरे देश की सेना तैनात करने की भी बात हुई. बैठक में निर्णय लिया गया कि इंग्लैंड या किसी अन्य नाटो देश से सेना यूक्रेन नहीं भेजी जा सकेगी. क्योंकि रूस नाटो देशों को नापसंद करता है. ऐसे में वेंस ने भारत या सऊदी अरब से सैनिकों को शांतिदूत के तौर पर भेजने का सुझाव दिया, लेकिन ट्रंप ने साफ इनकार कर दिया.
किताब के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें बहुत प्रिय हैं, लेकिन भारतीय कोई भी चीज लेने के बाद उसकी कीमत नहीं चुकाते.’ यह सच है कि पिछले चार दशकों से भारत ने अपने सैनिकों को किसी अन्य देश में शांति सेना के रूप में तैनात नहीं किया है।
भारतीय शांति सेना को आखिरी बार श्रीलंका भेजा गया
आखिरी बार भारतीय सेना को 80 के दशक में शांति सेना के रूप में श्रीलंका भेजा गया था, लेकिन वास्तविकता यह है कि संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की शांति सेना में सैनिकों की भागीदारी के मामले में भारत शीर्ष श्रेणी में है। भारत ने साफ कर दिया है कि संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में ही किसी युद्ध या गृह युद्ध को शांत करने के लिए भारतीय सैनिकों को दूसरे देश में भेजा जा सकता है, लेकिन भारत किन्हीं दो देशों के बीच चल रहे युद्ध में हस्तक्षेप नहीं करेगा.
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