8 महीने के लिए अंतरिक्ष होगा नया घर! भारतीय मूल के अनिल मेनन ने कजाकिस्तान से भरी उड़ान, जानें क्या है NASA का मिशन?

नासा के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन और दो रूसी अंतरिक्ष यात्री मंगलवार (14 जुलाई) को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के आठ महीने के मिशन के लिए सोयुज एमएस-29 अंतरिक्ष यान पर सवार होकर कजाकिस्तान से रवाना हुए। अनिल मेनन और रूसी अंतरिक्ष यात्री प्योत्र डबरोव और अन्ना किकिना को लेकर अंतरिक्ष यान भारतीय समयानुसार रात 8:17 बजे बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से रवाना हुआ।

इस यान को अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचने में लगभग तीन घंटे लगेंगे और यह पृथ्वी के दो चक्कर लगाएगा। इसके बाद रात 11:56 बजे यह अपने आप स्टेशन के ‘प्रिचल मॉड्यूल’ से कनेक्ट हो जाएगा। नासा के मुताबिक, अनिल मेनन की यह पहली अंतरिक्ष यात्रा है, जबकि दोनों रूसी अंतरिक्ष यात्री दूसरी बार अंतरिक्ष मिशन पर गए हैं।

अंतरिक्ष मिशन के प्रक्षेपण के दौरान अनिल मेनन के परिवार के सदस्य, जिनमें उनकी अंतरिक्ष यात्री पत्नी अन्ना विल्हेम और नासा प्रशासक जेरेड इसाकमैन शामिल थे, बैकोनूर कॉस्मोड्रोम में मौजूद थे। अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचने के बाद ये तीनों अंतरिक्ष यात्री नासा के अंतरिक्ष यात्री जेसिका मीर, जैक हैथवे और क्रिस विलियम्स, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी की अंतरिक्ष यात्री सोफी एडनोट और रोस्कोस्मोस के अंतरिक्ष यात्री सर्गेई कुड-सेवरचकोव, सर्गेई मिकाएव और आंद्रेई फेडयायेव के साथ मिशन में शामिल होंगे।

अप्रैल 2027 में पृथ्वी पर लौटेंगे

अनिल मेनन, प्योत्र डबरोव और अन्ना किकिना का यह मिशन करीब आठ महीने तक चलेगा। इन तीनों का अप्रैल 2027 में पृथ्वी पर लौटने का कार्यक्रम है। नासा के मुताबिक, अनिल मेनन अंतरिक्ष में वैज्ञानिक अनुसंधान और नई प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन करेंगे। उनका उद्देश्य मानव अंतरिक्ष अन्वेषण को आगे बढ़ाना और पृथ्वी पर जीवन को लाभ पहुंचाने वाली प्रौद्योगिकियों का विकास करना है।

रूस की अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहयोग एजेंसी रोसोट्रूडनिचेस्टवो की प्रमुख येलेना रेमीज़ोवा ने पहले सरकारी समाचार एजेंसी तास को बताया था कि इस रॉकेट के साथ भारतीय स्कूली बच्चों द्वारा बनाई गई पेंटिंग भी अंतरिक्ष में भेजी जा रही हैं।

अनिल मेनन अमेरिकी वायुसेना में काम कर चुके हैं

अनिल मेनन का जन्म अमेरिका के मिनियापोलिस में यूक्रेनी और भारतीय मूल के अप्रवासी माता-पिता के यहाँ हुआ था। वह पेशे से एक आपातकालीन चिकित्सा चिकित्सक हैं और अमेरिकी अंतरिक्ष बल में कर्नल हैं। अमेरिकी वायु सेना में अपनी सेवा के दौरान, उन्होंने ‘ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम’ के तहत अफगानिस्तान में अग्रिम पंक्ति में काम किया। इसके अलावा, उन्होंने हिमालयन रेस्क्यू एसोसिएशन के साथ भी काम किया, जहाँ उन्होंने माउंट एवरेस्ट पर पर्वतारोहियों को चिकित्सा सहायता प्रदान की।

अनिल मेनन (49) ने पोलियो टीकाकरण अभियान का अध्ययन और समर्थन करने के लिए भारत में ‘रोटरी एंबेसेडरियल स्कॉलर’ के रूप में एक वर्ष बिताया। उन्होंने 2014 में नासा में ‘फ्लाइट सर्जन’ के रूप में अपना करियर शुरू किया। इस दौरान उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर रहने और काम करने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के साथ काम किया।

अनिल मेनन को दिसंबर 2021 में नासा के अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना गया था। इसके बाद उन्होंने अगले महीने दो साल के प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होकर तैयारी शुरू कर दी। उनकी पत्नी अन्ना सितंबर 2024 में स्पेसएक्स द्वारा संचालित निजी मानव अंतरिक्ष मिशन ‘पोलारिस डॉन’ के तहत अंतरिक्ष की यात्रा कर चुकी हैं। ये मिशन करीब पांच दिनों तक चला.

इनपुट- पीटीआई

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