पांच करोड़ मामले. यही भारत के न्यायिक संकट का पैमाना है. सुप्रीम कोर्ट ने सात राज्यों को न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 से बढ़ाकर 62 करने का निर्देश देते हुए जिला न्यायपालिका में लंबित 5.18 करोड़ मामलों का हवाला दिया है। अनुभवी न्यायाधीशों को बनाए रखने से रिक्तियों और बढ़ते मुकदमों से जूझ रही अदालतों को कुछ राहत मिल सकती है। लेकिन एक अस्थायी उपाय को समाधान के साथ भ्रमित करना एक गलती होगी। आँकड़े एक परेशान करने वाली कहानी बताते हैं। अकेले जिला न्यायपालिका में 5.18 करोड़ मामले लंबित हैं। हरियाणा की जिला अदालतों में 15.5 लाख से अधिक मामले लंबित हैं, जबकि पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में 4.2 लाख से अधिक मामले हैं, जिनमें लगभग 1.25 लाख एक दशक से अधिक समय से लंबित हैं।
